UNSC की स्थायी सीट से पहले भारत का बड़ा दांव: 2028-29 के लिए अस्थायी सदस्यता की तैयारी क्यों?

भारत 2028-29 के लिए UNSC की अस्थायी सदस्यता के लिए कैंपेन कर रहा है। स्थायी सीट की मांग के साथ-साथ अस्थायी सीट को रणनीतिक हथियार बनाया जा रहा है। इससे भारत को 2 साल तक सुरक्षा संबंधी फैसलों पर वोटिंग, गठबंधन बनाने और UNSC सुधार का मुद्दा उठाने का मौका मिलेगा। भारत अब तक 8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है।

Jul 15, 2026 - 19:55
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UNSC की स्थायी सीट से पहले भारत का बड़ा दांव: 2028-29 के लिए अस्थायी सदस्यता की तैयारी क्यों?

नई दिल्ली। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए नया कदम उठाया है। भारत अब 2028-29 के कार्यकाल के लिए UNSC की अस्थायी सदस्यता के लिए अभियान चला रहा है। साथ ही परिषद में सुधार को लेकर भी दबाव बढ़ा रहा है।

सवाल उठता है कि जब भारत स्थायी सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है, तो अस्थायी सीट के लिए क्यों जोर लगा रहा है? कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक इसके पीछे एक ठोस रणनीति है।

अस्थायी सीट से क्या हासिल होगा भारत को  
UNSC की 10 अस्थायी सीटें हर 2 साल के लिए चुनी जाती हैं। इन सीटों पर रहने वाले देशों को वीटो पावर तो नहीं मिलती, लेकिन युद्ध, प्रतिबंध, शांति मिशन और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े अहम फैसलों पर वोटिंग का अधिकार जरूर मिलता है।

भारत इस सदस्यता के जरिए 3 बड़े फायदे चाहता है:  
1. प्रभाव बढ़ाना - 2 साल तक दुनिया के सबसे ताकतवर मंच पर बैठकर भारत अपने मुद्दे सीधे उठा सकेगा।  
2. समर्थन जुटाना - अस्थायी सदस्य रहते हुए भारत UNSC सुधार और स्थायी सीट के लिए ज्यादा देशों का समर्थन ले सकता है।  
3. योगदान दिखाना - भारत यह साबित करना चाहता है कि वह वैश्विक शांति और सुरक्षा में जिम्मेदारी निभाने को तैयार है।

स्थायी सदस्यता की राह में अस्थायी सीट मील का पत्थर  
UNSC में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन 5 स्थायी सदस्य हैं। 10 अस्थायी सदस्य हर 2 साल में बदलते हैं। भारत अब तक 8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है। 

विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी सदस्यता भारत को परिषद के अंदरूनी कामकाज को समझने, गठबंधन बनाने और सुधार के एजेंडे को आगे बढ़ाने का मौका देगी। यही अनुभव आगे स्थायी सदस्यता की दावेदारी को मजबूत करेगा।

भारत ने पहले ही कहा है कि 21वीं सदी की हकीकत के हिसाब से UNSC में बदलाव जरूरी हैं। 2028-29 की सीट इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है।

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