बिहार में उच्च शिक्षा का बड़ा बदलाव: 481 डिग्री कॉलेज अब सरकार के अधीन, यूनिवर्सिटी संभालेंगी सिर्फ PG और रिसर्च

बिहार सरकार 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालयों से अलग कर सीधे अपने अधीन लाने जा रही है। मानसून सत्र में नया उच्च शिक्षा विधेयक आएगा। अब यूनिवर्सिटी सिर्फ PG और रिसर्च देखेंगी। शिक्षकों के लिए NET जरूरी, PhD हटेगी और राजनीतिक गतिविधियों पर बैन लगेगा। हर जिले में उच्च शिक्षा पदाधिकारी भी तैनात होंगे।

Jul 18, 2026 - 19:43
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बिहार में उच्च शिक्षा का बड़ा बदलाव: 481 डिग्री कॉलेज अब सरकार के अधीन, यूनिवर्सिटी संभालेंगी सिर्फ PG और रिसर्च

पटना। बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार मानसून सत्र में एक नया उच्च शिक्षा विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। इस कानून के लागू होते ही राज्य के सभी 481 सरकारी डिग्री कॉलेज विश्वविद्यालयों के नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे।

नए प्रस्ताव के मुताबिक अब ये सभी कॉलेज सीधे शिक्षा विभाग के अधीन काम करेंगे। वहीं विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी सिर्फ स्नातकोत्तर यानी PG कोर्स और रिसर्च तक सीमित रह जाएगी। इसके लिए पटना विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 और बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 में बड़े संशोधन किए जाएंगे।

क्या-क्या बदलेगा?

1. कॉलेज सरकार चलाएगी, यूनिवर्सिटी नहीं  
अभी राज्य के 12 विश्वविद्यालयों के अधीन चलने वाले डिग्री कॉलेजों का पूरा प्रशासन - शिक्षकों की नियुक्ति, ट्रांसफर, प्रमोशन और सेवा शर्तें - विश्वविद्यालय देखते हैं। नए कानून के बाद ये सभी अधिकार सीधे सरकार के पास आ जाएंगे।

2. शिक्षकों के लिए नए नियम  
नए विधेयक में शिक्षकों को लेकर कई कड़े प्रावधान हैं:
- कॉलेज शिक्षक किसी भी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। न प्रचार कर सकेंगे, न लेखन।
- असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए अब न्यूनतम योग्यता NET + PG डिग्री होगी। 
- इस पद के लिए PhD की अनिवार्यता खत्म करने का प्रस्ताव है।

3. कॉलेज से यूनिवर्सिटी प्रमोशन का रास्ता बंद  
अब तक कॉलेज में पढ़ाने वाले शिक्षक अनुभव के आधार पर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बन सकते थे। नए नियम लागू होने के बाद ये व्यवस्था खत्म हो जाएगी। अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का कैडर अलग-अलग रहेगा।

4. हर जिले में होगा 'उच्च शिक्षा पदाधिकारी
स्कूली शिक्षा की तरह अब उच्च शिक्षा की मॉनिटरिंग भी जिलास्तर पर होगी। हर जिले में एक उच्च शिक्षा पदाधिकारी तैनात किया जाएगा जो सभी सरकारी डिग्री कॉलेजों की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों पर नजर रखेगा।

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से कॉलेजों का संचालन ज्यादा तेज और पारदर्शी होगा।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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