RJD को झटका: ब्राह्मण चेहरा मृत्युंजय तिवारी ने प्रवक्ता पद से दिया इस्तीफा, "सम्मान नहीं मिल रहा"

RJD के वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने सम्मान न मिलने का आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया में बोलने से रोका जा रहा था। प्रदेश अध्यक्ष ने तेजस्वी यादव के लौटने तक रुकने को कहा है। पार्टी में शक्ति सिंह यादव से मतभेद को इस्तीफे की बड़ी वजह बताया जा रहा है। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी पहचान RJD के लिए अहम मानी जाती है।

Jul 17, 2026 - 15:56
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RJD को झटका: ब्राह्मण चेहरा मृत्युंजय तिवारी ने प्रवक्ता पद से दिया इस्तीफा, "सम्मान नहीं मिल रहा"

पटना। बिहार की सियासत में गुरुवार को बड़ी हलचल। RJD के वरिष्ठ प्रवक्ता और पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण नेता मृत्युंजय तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वजह बताई - पार्टी में लगातार हो रही उपेक्षा और सम्मान की कमी।

मृत्युंजय तिवारी ने अपना इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को सौंपा। मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा, "जब पार्टी में इज्जत ही नहीं बची तो पद पर रहने का क्या फायदा।" 

तेजस्वी के लौटने तक रुका मामला  
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष ने उनसे तेजस्वी यादव के विदेश से लौटने तक इंतजार करने को कहा है। अभी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। पार्टी कार्यालय में कोषाध्यक्ष सुनील सिंह और तनवीर हसन समेत कई नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश भी की।

टीवी पर न बोलने देने से नाराजगी  
पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि नाराजगी की सबसे बड़ी वजह मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव हैं। पिछले एक दशक से मृत्युंजय राष्ट्रीय चैनलों पर RJD का पक्ष रखते थे। लेकिन पिछले कुछ महीनों से उन्हें मीडिया में बोलने से रोका जा रहा था। इसी मुद्दे पर उन्होंने नेतृत्व से शिकायत भी की थी।

इस्तीफे के बाद जारी बयान में मृत्युंजय ने कहा, "पिछले 6-7 महीने से मुझे अपमानित किया जा रहा है। तेजस्वी जी से कई बार कहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। तेजस्वी को कुछ लोगों ने घेर रखा है। यहां तक कि लालू जी और राबड़ी जी भी कुछ नहीं कर पा रहे।"

RJD के लिए बड़ा नुकसान?  
RJD की पहचान लंबे समय से MY यानी यादव-मुस्लिम समीकरण रही है। ऐसे में मृत्युंजय तिवारी पार्टी के सबसे बड़े ब्राह्मण चेहरों में से एक माने जाते थे। वो टीवी डिबेट से लेकर सार्वजनिक मंचों तक पार्टी की लाइन मजबूती से रखते थे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले एक पुराने और मुखर प्रवक्ता का इस तरह किनारा करना RJD के लिए सामाजिक और सियासी दोनों स्तर पर नुकसानदेह हो सकता है।

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