'दिल बदलिए प्रधानमंत्री जी'... पेपर लीक पर संसद में बरसीं प्रियंका गांधी

एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोदी सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने युवाओं पर बल प्रयोग का सवाल उठाया, पिछले 10 साल में 152 पेपर लीक का जिक्र किया और कहा कि माफिया के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। प्रियंका ने शिक्षा व्यवस्था को RSS और NTA के हवाले करने का आरोप लगाया और बजट में शिक्षा के हिस्से के घटने पर भी सवाल उठाए। पूर्व मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

Jul 28, 2026 - 19:23
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'दिल बदलिए प्रधानमंत्री जी'... पेपर लीक पर संसद में बरसीं प्रियंका गांधी

नई दिल्ली: लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार को दिखावे की जगह संवेदनशीलता दिखानी होगी।

कैमरे का एंगल नहीं, दिल का एंगल चाहिए
प्रियंका ने कहा, प्रधानमंत्री जी को कैमरे का एंगल बदलने की जरूरत नहीं है, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा। 

उन्होंने सीधे सवाल किया कि देश के छात्रों के विरोध के दौरान पैलेट गन और AK-47 चलाने का आदेश किसने दिया? क्या ये फैसला PM ने लिया या गृह मंत्री ने? पूरे देश को इसका जवाब चाहिए।

10 साल में 152 पेपर लीक  
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में 152 बार पेपर लीक हुए हैं। इससे करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा। लेकिन पेपर लीक माफिया के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और न ही किसी बड़े आरोपी को सजा मिली।

इसकी वजह से युवाओं का सिस्टम पर से भरोसा उठ गया है, उन्होंने कहा।

शिक्षा व्यवस्था पर हमला  
प्रियंका ने सरकार पर शिक्षा संस्थानों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संस्थानों में RSS के प्रचारकों की नियुक्तियां बढ़ाई गईं और NTA बनाकर परीक्षा प्रणाली का केंद्रीकरण कर दिया गया। उन्होंने आंकड़ा देते हुए कहा कि देश के कुल बजट में शिक्षा का हिस्सा 1.4 लाख करोड़ है, जो हर साल बढ़ने के बजाय घट रहा है। 

धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर सवाल  
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद में हुए स्वागत का जिक्र करते हुए प्रियंका ने कहा, उसी दिन महाराष्ट्र में एक छात्रा के परिवार में पेपर लीक की वजह से मातम था और यहां सम्मान हो रहा था। जहां आत्ममंथन होना चाहिए था वहां जश्न मनाया गया। ऐसे में छात्र सरकार पर भरोसा कैसे करेंगे?

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