JPSC धांधली में CID का बड़ा खुलासा - पूर्व चेयरमैन L. ख्यांग्ते ने लैपटॉप से डेटा डिलीट कर सबूत मिटाए, 500 OMR शीट में गड़बड़ी

झारखंड लोक सेवा आयोग में धांधली की जांच कर रही CID ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर पूर्व चेयरमैन L. ख्यांग्ते पर सबूत मिटाने का आरोप लगाया है। जांच एजेंसी के मुताबिक 22 जुलाई 2026 को छापेमारी के बाद इस्तीफा देकर ख्यांग्ते सरकारी लैपटॉप और पेन ड्राइव ले गए और डेटा डिलीट कर दिया। जांच में 500 OMR शीट में छेड़छाड़, 5 से 25 लाख तक वसूली और ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को परीक्षा का ठेका देने का सिंडिकेट सामने आया है।

Sep 09, 2026 - 18:24
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JPSC धांधली में CID का बड़ा खुलासा - पूर्व चेयरमैन L. ख्यांग्ते ने लैपटॉप से डेटा डिलीट कर सबूत मिटाए, 500 OMR शीट में गड़बड़ी

रांची - JPSC में भर्ती धांधली की जांच में CID ने कोर्ट में चौंकाने वाले दावे किए हैं। पूर्व चेयरमैन L. ख्यांग्ते की जमानत का विरोध करते हुए दाखिल हलफनामे में एजेंसी ने कहा है कि ख्यांग्ते ने सबूत मिटाने की कोशिश की है।

CID के अनुसार 22 जुलाई 2026 को आयोग में छापेमारी के तुरंत बाद ख्यांग्ते ने इस्तीफा दे दिया और सरकारी लैपटॉप और पेन ड्राइव साथ ले गए। फॉरेंसिक रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि लैपटॉप से डेटा डिलीट किया गया और हार्ड डिस्क को नुकसान पहुंचाया गया। साथ ही बिचौलियों से वित्तीय लेनदेन और कॉल डिटेल के सबूत भी मिले हैं।

कैसे चलता था सिंडिकेट?

हलफनामे में खुलासा हुआ है कि JPSC अधिकारियों, बिचौलियों और ब्लैकलिस्टेड एजेंसी का संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था।

OMR में गड़बड़ी: फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर परीक्षा में 350 से ज्यादा और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट परीक्षा में 150 से ज्यादा यानी कुल 500 OMR शीट से छेड़छाड़ की गई।
वसूली का रेट: PT पास कराने के लिए 5 लाख और फाइनल सेलेक्शन के लिए 10 से 25 लाख रुपये तक लिए जाते थे।
गारंटी: अभ्यर्थियों के ओरिजिनल सर्टिफिकेट, ब्लैंक चेक और स्टाम्प पेपर जमा करा लिए जाते थे।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका: JSSC ने जिस TDPL कंपनी को मई 2025 में ब्लैकलिस्ट किया था, उसी को जून 2025 में JPSC की परीक्षा का जिम्मा दे दिया गया।

आपत्ति उठाने वाले अधिकारी को हटाया गया
जब तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोटा ने TDPL को काम देने पर ऐतराज जताया तो ख्यांग्ते ने उनसे प्रभार छीन लिया और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को जिम्मेदारी दे दी, जो ट्रांसफर के बाद भी ख्यांग्ते के कहने पर आयोग में काम करती रहीं।

CID के मुताबिक TDPL का मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी इस सिंडिकेट का मुख्य सरगना है, जो खुद भी कई परीक्षाओं में बैठकर पास हुआ था।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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