दरभंगा शिक्षक MLC में कांग्रेस का सूपड़ा साफ - 40 साल की राजनीति वाले दिग्गज मदन मोहन झा 406 वोट से हारे, जनसुराज के सुरेश राय ने फहराया परचम, ब्राह्मण वोट क्यों छिटका?

बिहार MLC चुनाव में कांग्रेस को ब्राह्मण वोट से झटका दरभंगा शिक्षक क्षेत्र से दिग्गज मदन मोहन झा 2,269 वोट पाकर हारे जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय को 2,593 वोट 406 वोट के अंतर से जीत, मदन मोहन झा 40 साल की राजनीति पिता डॉ नागेंद्र झा कांग्रेस कद्दावर और शिक्षा मंत्री खुद BPCC अध्यक्ष रहे महागठबंधन में राजस्व मंत्री रहे 1985-95 मणिगाछी विधायक मई 2014 से दरभंगा शिक्षक MLC नवंबर 2020 में दूसरी बार जीते कार्यकाल 16 नवंबर 2026 तक था हैट्रिक नहीं लगी, हार की वजह ब्राह्मण नेताओं की पूछ नहीं 2025 विधानसभा में प्रेम चंद्र मिश्रा को दूर रखा रणनीति में नहीं लिया असित नाथ तिवारी से मीडिया स्क्रीनिंग कराई पर चेयरमैन किसी और को बनाया नाराजगी से प्रशांत किशोर के जनसुराज की ओर झुकाव का फायदा सुरेश राय को मिला, कांग्रेस के 5 उम्मीदवारों में से कोई अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया।

Oct 28, 2026 - 17:56
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दरभंगा शिक्षक MLC में कांग्रेस का सूपड़ा साफ - 40 साल की राजनीति वाले दिग्गज मदन मोहन झा 406 वोट से हारे, जनसुराज के सुरेश राय ने फहराया परचम, ब्राह्मण वोट क्यों छिटका?

दरभंगा। बिहार में कांग्रेस से ब्राह्मणों का मोहभंग हो रहा है, इसकी झलक दरभंगा शिक्षक MLC चुनाव में साफ दिखी। पार्टी के सबसे बड़े ब्राह्मण चेहरे ही हार गए।

406 वोट से हारे दिग्गज, जनसुराज ने मारी बाजी

दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का रिजल्ट -

जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय - 2,593 वोट - जीते
कांग्रेस के डॉ. मदन मोहन झा - 2,269 वोट - हारे
अंतर - 406 वोट

कौन हैं मदन मोहन झा? 40 साल की राजनीति खतरे में

इनका हारना राजनीतिक जगत को चौंका गया, क्योंकि इनके नाम बड़ी विरासत है -

पिता डॉ. नागेंद्र झा - कांग्रेस के कद्दावर नेता, बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री
खुद 1985 से 1995 तक मणिगाछी से विधायक
मई 2014 से दरभंगा शिक्षक क्षेत्र से MLC, नवंबर 2020 में दूसरी बार जीते
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी (BPCC) के अध्यक्ष रह चुके हैं
नीतीश के महागठबंधन में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री
मौजूदा कार्यकाल 16 नवंबर 2026 तक था, हैट्रिक से चूके

हार के पीछे ब्राह्मण नाराजगी का बड़ा खेल?

गलियारों में 2 बड़ी चर्चाएं हैं -

1. 2025 विधानसभा से ही नाराजगी: कहा जा रहा है कि MLC प्रेम चंद्र मिश्रा को पूरे चुनाव से दूर रखा गया। रणनीतिकार तक में शामिल नहीं किया, उम्मीदवार चयन में तरजीह नहीं दी।

2. मीडिया विभाग में धोखा: पार्टी ने मीडिया में बदलाव के लिए प्रवक्ता असित नाथ तिवारी को आगे किया। सभी जिलों में मीडिया प्रवक्ताओं की स्क्रीनिंग असित के नेतृत्व में हुई, पर जब चेयरमैन बनाने की बारी आई तो किसी और को बना दिया।

इन दोनों घटनाओं से ब्राह्मण समाज में नाराजगी थी। इसी का फायदा प्रशांत किशोर के जनसुराज को मिला। ब्राह्मणों का झुकाव PK की तरफ दिखा और वोट सुरेश प्रसाद राय को ट्रांसफर हो गया।

कांग्रेस के 5 के 5 उम्मीदवार फेल

दरभंगा ही नहीं, बिहार के बाकी 4 सीटों पर भी कांग्रेस उम्मीदवार अच्छा प्रदर्शन तक नहीं कर पाए। इससे ये धारणा और पक्की हो गई कि कांग्रेस में ब्राह्मण नेताओं की पूछ घट रही है, और इसका खामियाजा पार्टी को शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र जैसे पारंपरिक गढ़ में भी भुगतना पड़ा।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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