जेल गए तो शाकाहारी बने लालू यादव - भगवान शिव सपने में आए, शाकाहारी बनने से 2004 में बने रेल मंत्री, वादा तोड़ा तो 2009 में 4 सीट पर सिमटे, 2013 में रांची जेल में फिर बदली दिनचर्या
लालू यादव 2001 में जेल गए तो दावा किया भगवान शिव सपने में आए और शाकाहारी बनने को कहा 2004 में रेल मंत्री बने, 2009 लोकसभा से पहले मांस-मछली खाने लगे तो 4 सीट पर सिमटे मंत्री पद गया, 30 सितंबर 2013 को चारा घोटाला में CBI कोर्ट ने दोषी ठहराया बिरसा मुंडा जेल भेजे गए 3 अक्टूबर को 5 साल की सजा सांसदी रद्द, जेल में फिर शाकाहारी बने गीता पढ़ने लगे 2015 में राजद फिर सत्ता में आई, उस दौरान राबड़ी को RJD अध्यक्ष बनाना चाहते थे लेकिन रघुवंश, जगदानंद, प्रभुनाथ ने कलेक्टिव लीडरशिप का प्रस्ताव रखा कांग्रेस नीतीश के करीब चली गई।
पटना। लालू यादव और शाकाहार का रिश्ता जेल से जुड़ा रहा है। कहानी 2001 से शुरू होती है।
2001 में जेल, सपने में आए शिव
लालू यादव 2001 में जेल गए तो शाकाहारी बन गए थे। उनका दावा था - भगवान शिव सपने में आए और शाकाहारी बनने को कहा। इस आशीर्वाद के बाद वे 2004 में रेल मंत्री बने।
2009 में वादा तोड़ा, सियासी झटका
2009 लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने शिव से किया वादा तोड़ दिया, फिर मांस-मछली खाने लगे। नतीजा - लोकसभा में झटका लगा, RJD सिर्फ 4 सीट जीती, मंत्री पद भी गया।
2013 - फिर जेल, फिर शाकाहारी
30 सितंबर 2013 को CBI स्पेशल कोर्ट ने चारा घोटाला में दोषी ठहराया, उसी दिन हिरासत में लेकर रांची के बिरसा मुंडा जेल भेजा। साथ में पूर्व CM जगन्नाथ मिश्र भी जेल गए। 3 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से 5 साल की सजा, सांसदी रद्द।
राबड़ी देवी ने तब कहा था - मैं भी RJD को वैसे चलाऊंगी जैसे सोनिया गांधी पुत्र के साथ कांग्रेस चलाती हैं।
रांची जेल में फिर दिनचर्या बदली - मांस-मछली छोड़ी, श्रीमद्भागवत गीता और धार्मिक किताबें पढ़ने लगे। इसके बाद 2015 में RJD फिर सत्ता में आई। जीत में आरक्षण, जातीय समीकरण के साथ ज्योतिषीय सलाह की भी चर्चा रही।
राबड़ी को अध्यक्ष क्यों नहीं बना पाए?
लालू 2013 में जेल जाते समय राबड़ी देवी को RJD का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहते थे, लेकिन नहीं बना पाए। राबड़ी ने कहा - बिना पद लिए काम करूंगी।
चर्चा थी - RJD के तीन सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह, जगदानंद सिंह और प्रभुनाथ सिंह ने राबड़ी के नेतृत्व से इनकार कर कलेक्टिव लीडरशिप का प्रस्ताव रखा था। पार्टी एकजुट रखनी थी, इसलिए लालू ने मान लिया।
उधर कांग्रेस लालू से छिटककर नीतीश के करीब जा रही थी, 4 विधायकों ने नीतीश के विश्वास मत का समर्थन किया था। जब राहुल गांधी ने सजायाफ्ता नेताओं को बचाने वाले अध्यादेश को फाड़ा, नीतीश ने तारीफ की थी।
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