झारखंड में 'कोऑर्डिनेशन' पर सवाल, सुरक्षा लौटाकर दिल्ली पहुंचे वित्त मंत्री, खरगे से की मुलाकात...

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर सुरक्षा वापस करने के बाद दिल्ली में खरगे से मिले, लेकिन सरकार के AI समिट में शामिल नहीं हुए। उनका कहना है कि उन्हें कार्यक्रम की सूचना ही नहीं थी। एक अतिरिक्त गाड़ी न मिलने पर उन्होंने सुरक्षा लौटाई थी। मंत्री के इस कदम से गठबंधन सरकार में कोऑर्डिनेशन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

Jul 09, 2026 - 19:02
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झारखंड में 'कोऑर्डिनेशन' पर सवाल, सुरक्षा लौटाकर दिल्ली पहुंचे वित्त मंत्री, खरगे से की मुलाकात...

झारखंड सरकार के भीतर तालमेल को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सुरक्षा वापस लौटाने के बाद दिल्ली का दौरा किया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे व वरिष्ठ नेता जयराम रमेश से मुलाकात की।

लेकिन इसी दौरान दिल्ली के ताज होटल में झारखंड सरकार का 'नेशनल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन-2026' चल रहा था। इस बड़े कार्यक्रम में CM हेमंत सोरेन के साथ कांग्रेस कोटे से मंत्री दीपिका पांडे सिंह, इरफान अंसारी और JMM व RJD के मंत्री भी मौजूद थे। हैरानी की बात ये रही कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर इस अहम बैठक में नहीं पहुंचे।

क्या कहा वित्त मंत्री ने?  
मीडिया से बातचीत में राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम की कोई सूचना नहीं मिली। "मैं दो दिनों से रांची में नहीं हूं। कार्यक्रम को लेकर कोई पत्र भी नहीं मिला है।" कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाईं।

सुरक्षा वापसी का विवाद  
इससे पहले वित्त मंत्री ने डीजीपी को पत्र लिखकर अपने सुरक्षाकर्मियों के लिए एक अतिरिक्त गाड़ी मांगी थी। गाड़ी नहीं मिलने पर नाराज होकर उन्होंने अपनी पूरी सुरक्षा ही वापस कर दी थी। उन्होंने इस मामले में वित्त विभाग के संयुक्त सचिव पंकज सिंह के पत्र पर भी सवाल उठाते हुए विभागीय सचिव से जवाब मांगा था, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है।

खरगे से क्या हुई चर्चा?  
दिल्ली में खरगे से मुलाकात के बाद राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि संगठन और सरकार के बीच समन्वय बेहतर है। "CM हेमंत सोरेन के साथ मिलकर विकास योजनाओं को गति दी जा रही है। गठबंधन की नीतियों को सामूहिक रूप से लागू करने का प्रयास जारी है।"

गठबंधन सरकार में शामिल एक वरिष्ठ मंत्री का बड़े सरकारी कार्यक्रम से दूर रहना और फिर हाईकमान से मुलाकात करना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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