बिहार का डस्टबिन घोटाला बना सियासी मुद्दा, मंगल पांडेय, तेजस्वी और प्रशांत किशोर आमने-सामने
बिहार में BMSICL द्वारा मेडिकल वेस्ट डस्टबिन की खरीद में घोटाले का आरोप लगने के बाद सियासत तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि बाजार में 1000-1500 रुपये वाले डस्टबिन 15,000 रुपये में खरीदे गए। इस पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय घिरे हैं, वहीं तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर के बीच भी जुबानी जंग शुरू हो गई है।
बिहार में एक बार फिर घोटाले को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। चारा, अलकतरा, शौचालय और सृजन घोटाले के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के डस्टबिन खरीद मामले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अगस्त 2026 में सामने आए इस मामले को विपक्ष ने 'डस्टबिन घोटाला' नाम दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कार्पोरेशन लिमिटेड यानी BMSICL द्वारा सरकारी अस्पतालों के लिए मेडिकल वेस्ट डस्टबिन खरीदने से जुड़ा है।
RTI से मिले दस्तावेजों और वायरल रिपोर्ट्स के हवाले से विपक्ष का दावा है कि 75 लीटर का प्लास्टिक डस्टबिन जो बाजार में 1000 से 1500 रुपये में मिलता है, उसे 15,490 रुपये प्रति पीस के हिसाब से खरीदा गया। इसी तरह 45 लीटर वाले डस्टबिन जिसकी कीमत 700 रुपये के आसपास है, उसे 11 हजार रुपये में खरीदा गया। आरजेडी का आरोप है कि यह करीब 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का मामला है।
इस मुद्दे को सबसे पहले राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने उठाया था और इसे VIP डस्टबिन बताया था। बाद में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस पर सरकार को घेरा।
सरकार और विभाग का पक्ष
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ये सामान्य कूड़ेदान नहीं हैं। विभाग के मुताबिक ये माइक्रोवेव-बेस्ड मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट सिस्टम के लिए बने हाई-टेम्परेचर रेजिस्टेंट कंटेनर हैं, जिसमें मेडिकल ग्रेड लाइनर्स भी शामिल हैं। तकनीकी स्पेसिफिकेशन, ट्रांसपोर्ट और टैक्स की वजह से कीमत ज्यादा है। सामान्य डस्टबिन से इसकी तुलना सही नहीं है। फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं और विशेष सचिव को जांच अधिकारी बनाया गया है।
तेजस्वी बनाम प्रशांत किशोर, मंगल पांडेय निशाने पर
आरजेडी ने सीधे तौर पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा विधायक मंगल पांडेय को जिम्मेदार ठहराया है, क्योंकि अंतिम खरीद उनके कार्यकाल में हुई।
वहीं इस विवाद में जन सुराज के विधायक प्रशांत किशोर की एंट्री ने कहानी में नया मोड़ ला दिया है। प्रशांत किशोर का दावा है कि इस खरीद की प्रक्रिया की शुरुआत उस समय हुई जब तेजस्वी यादव खुद स्वास्थ्य मंत्री थे और बाद में मंगल पांडेय के कार्यकाल में इसे पूरा किया गया। इसलिए दोनों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
इस बयान के बाद तेजस्वी और प्रशांत किशोर के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। तेजस्वी ने पलटवार करते हुए कहा है कि अगर घोटाला हुआ होता तो ED-CBI उन्हें छोड़ती नहीं और प्रशांत किशोर भाजपा को बचाने के लिए उनका नाम घसीट रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांकीपुर जैसी भाजपा की मजबूत सीट जीतने के बाद प्रशांत किशोर विपक्ष में तेजस्वी के सामने एक नई चुनौती के तौर पर उभरे हैं, और डस्टबिन घोटाले को लेकर दोनों में वर्चस्व की लड़ाई भी दिख रही है।
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