JDU का 'U' हटाकर जनता दल नीतीश करने की तैयारी, संजय झा के बयान से बिहार में सियासी हलचल, विपक्ष बोला- अंदर सब ठीक नहीं
जनता दल यूनाइटेड के 'यू' को लेकर अब बहस तेज है। कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने खगड़िया में JDU का नाम बदलकर जनता दल नीतीश करने का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि यह नीतीश कुमार की विचारधारा की पार्टी है। JDU का गठन 30 अक्टूबर 2003 को जनता दल, समता पार्टी और लोकशक्ति के विलय से हुआ था। विपक्ष का दावा है कि नीतीश की तबीयत के बाद पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई है और नाम बदलने का शिगूफा वोट बैंक को साधने की कोशिश है।
पटना - जनता दल यूनाइटेड यानी JDU के नाम में मौजूद 'यू' अब चर्चा में है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा है कि पार्टी का नाम जनता दल नीतीश कर देना चाहिए।
खगड़िया में एक जनसभा में संजय झा ने कहा कि यह नीतीश कुमार की पार्टी है, उनकी विचारधारा की पार्टी है, इसलिए नाम भी उनके नाम पर होना चाहिए।
JDU का इतिहास क्या है?
JDU का गठन 30 अक्टूबर 2003 को हुआ था। तब शरद यादव की जनता दल, जॉर्ज फर्नांडीस और नीतीश कुमार की समता पार्टी और कर्नाटक के रामकृष्ण हेगड़े की लोकशक्ति पार्टी का विलय हुआ था। 1999 में जनता दल के NDA समर्थन पर बंटवारे के बाद यह नया रूप जनता दल यूनाइटेड बना। तब 'यूनाइटेड' शब्द की सार्थकता थी।
संजय झा खुद 2012 तक BJP में थे। चर्चा है कि अरुण जेटली के सुझाव पर वे JDU में आए थे।
विपक्ष का तंज
विपक्ष कह रहा है कि ज्यादा योगी मठ उजाड़ वाली कहावत JDU पर लागू हो रही है। नीतीश की सेहत को लेकर पार्टी के अंदर शीर्ष नेता वर्चस्व की लड़ाई में हैं और नीतीश के वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए नाम बदलने का दांव चल रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि अगर नाम बदलना ही है तो विशेष अधिवेशन या कार्यकारिणी में प्रस्ताव लाना चाहिए था, जनसभा में नहीं। इसे संजय झा द्वारा खुद को नीतीश के करीबी दिखाने की जुगत बताया जा रहा है।
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