कोटे में कोटा पर बिहार में सियासी घमासान, संतोष सुमन का तेजस्वी पर हमला- 15 साल के राज का हिसाब दो, मांझी-डोम-नट अब भी वंचित

बिहार में आरक्षण की समीक्षा और कोटे में कोटा पर सियासत तेज। लघु जल संसाधन मंत्री और हम (से) अध्यक्ष संतोष सुमन ने RJD नेता तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला, कहा- समीक्षा की बात आते ही हंगामा कि आरक्षण खत्म हो जाएगा, हम आरक्षण खत्म करने नहीं, वंचित तक लाभ पहुंचाने की बात कर रहे हैं। मांझी, डोम, नट, हलखोर जैसे समुदाय आज भी उचित हिस्से से वंचित। तेजस्वी को 15 साल के माता-पिता के शासन का हिसाब देना चाहिए। सवाल- सामान्य सीटों पर कितने दलितों को टिकट, यादव बहुल क्षेत्रों में कितने दलित उम्मीदवार, MLC-राज्यसभा में वंचितों को कितनी जगह? सामाजिक न्याय सिर्फ प्रतिशत बढ़ाना नहीं, लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

Sep 02, 2026 - 18:38
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कोटे में कोटा पर बिहार में सियासी घमासान, संतोष सुमन का तेजस्वी पर हमला- 15 साल के राज का हिसाब दो, मांझी-डोम-नट अब भी वंचित

पटना - बिहार में आरक्षण की समीक्षा और 'कोटे में कोटा' को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। लघु जल संसाधन मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (से) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोला है।

सुमन ने कहा - जैसे ही आरक्षण की समीक्षा और कोटे में कोटा की बात आती है, कुछ लोग हंगामा शुरू कर देते हैं कि आरक्षण खत्म हो जाएगा। हम आरक्षण खत्म करने या किसी का हक छीनने की बात नहीं कर रहे।

सबसे वंचित तक लाभ पहुंचे

सुमन ने कहा - मकसद ये सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का असली लाभ समाज के सबसे वंचित तबके तक पहुंचे। दलित आरक्षण के भीतर सबसे वंचितों के लिए 'कोटे में कोटा' पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। सवाल उठना चाहिए कि लाभ किन जातियों, किन परिवारों तक पहुंच रहा है।

उन्होंने मांझी, डोम, नट, हलखोर समेत कई समुदायों का जिक्र किया जो आज भी अपने हिस्से और वास्तविक भागीदारी का इंतजार कर रहे हैं।

तेजस्वी पर निशाना - 15 साल का हिसाब दो

सुमन ने कहा - दलितों को ज्ञान देने से पहले तेजस्वी को अपने माता-पिता के 15 साल के शासन और अपनी राजनीति का हिसाब देना चाहिए। उस दौर में दलितों की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए क्या स्थायी व्यवस्था बनी?

उन्होंने पूछा - आरक्षित सीटों पर दलित उम्मीदवार संविधान और आरक्षण की वजह से लड़ते हैं, ये किसी दल-परिवार की कृपा नहीं है। बताओ-
सामान्य सीटों पर कितने दलितों को टिकट दिया?
यादव बहुल क्षेत्रों से कितने दलित उम्मीदवार उतारे?
विधान परिषद और राज्यसभा में सबसे वंचित दलितों को कितना प्रतिनिधित्व दिया?

सामाजिक न्याय का मतलब

सुमन बोले - दलितों को वोट बैंक समझना आसान है, लेकिन दलित नेतृत्व मजबूत करना असली सामाजिक न्याय की कसौटी है। सामाजिक न्याय सिर्फ प्रतिशत बढ़ाना नहीं, लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

उन्होंने बिहार में सामाजिक बदलाव के लिए CM नीतीश कुमार के नेतृत्व और पूर्व CM जीतन राम मांझी के योगदान का भी जिक्र किया और कहा - असली न्याय तब होगा जब दलितों को सामान्य सीटों से भी लड़ने का मौका मिले, MLC, राज्यसभा, मंत्रिमंडल और संगठन में बराबर भागीदारी मिले। आरक्षण रहेगा, मजबूत रहेगा और सबसे वंचितों के लिए कोटे में कोटा की दिशा में प्रयास जारी रहेगा।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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