नेपाल में कुदरत का कहर, 1127 मौतें, 4858 लापता, PM बालेन शाह ने संसद में कहा- भारत-चीन ने भेजे एक्सपर्ट्स, भारत ने बचाईं 163 जिंदगियां

नेपाल में भीषण बाढ़-भूस्खलन से अब तक 1127 लोगों की मौत, 4858 लापता, 6541 लोगों को रेस्क्यू। PM बालेन शाह ने संसद के विशेष सत्र में भारत और चीन का आभार जताया, कहा- पहले दिन से दोनों देशों ने एक्सपर्ट्स भेजकर हवाई सर्वे किया, दुर्गम इलाकों तक रेस्क्यू का रास्ता खोजा। कीचड़-मलबे में मशीनें भी फेल, भारतीय टनल-रेस्क्यू यूनिट ने बचाईं जानें। भारत ने वायुसेना से 70 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेजी, 24x7 कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन एक्टिव। बालेन शाह ने तबाही की वजह क्लाइमेट चेंज और ग्लेशियर पिघलना बताया।

Sep 02, 2026 - 18:01
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नेपाल में कुदरत का कहर, 1127 मौतें, 4858 लापता, PM बालेन शाह ने संसद में कहा- भारत-चीन ने भेजे एक्सपर्ट्स, भारत ने बचाईं 163 जिंदगियां

काठमांडू: नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन ने पूरे देश को हिला दिया है। चारों तरफ तबाही का मंजर है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1127 लोगों की मौत हो चुकी है, 4858 लोग अब भी लापता हैं और 6541 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। हादसे को एक हफ्ते से ज्यादा हो गया, फिर भी टीमें मलबे में जिंदगी तलाश रही हैं।

संसद में गूंजा भारत-चीन का शुक्रिया

संकट की इस घड़ी में PM बालेन शाह ने संसद के विशेष सत्र में देश को संबोधित किया। भावुक होते हुए उन्होंने कहा - इतनी बड़ी राष्ट्रीय आपदा में अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार का सवाल ही नहीं था। जब पूरा देश पानी में डूब रहा था, तब भारत और चीन ने खबर मिलते ही अपने एक्सपर्ट्स-तकनीशियन भेज दिए। पहले दिन से उन्होंने हवाई सर्वेक्षण कर तबाही का दायरा नापा और दुर्गम इलाकों तक पहुंचने का रास्ता खोजा।

कीचड़-मलबे में रेस्क्यू की बड़ी चुनौती

PM शाह ने बताया - ये आम बाढ़ नहीं, असाधारण स्थिति थी। कई जगह इतना कीचड़, मलबा और पत्थर था कि भारी मशीनें तो दूर, नेपाल आर्मी और सशस्त्र पुलिस के जवानों को पैर टिकाने की जगह नहीं थी। ऐसे में भारतीय एक्सपर्ट्स ने आधुनिक उपकरणों से रेस्क्यू आगे बढ़ाया, खतरनाक इलाकों में जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाया।

भारत का महा-मिशन - टनल से DNA तक

भारत ने बिना देरी बड़े पैमाने पर मदद शुरू की -

टनल-रेस्क्यू यूनिट्स - सड़क और सुरंगों में फंसे लोगों के लिए
डॉक्टरों की टीम, इमरजेंसी दवाएं
फॉरेंसिक और DNA एक्सपर्ट्स - शवों की पहचान के लिए
70 टन से ज्यादा राहत सामग्री - वायुसेना के विमानों से 4 खेप में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, दवाएं
भारतीय टीमों ने सीधे बाढ़ क्षेत्र में उतरकर 163 से ज्यादा लोगों को बचाकर अस्पताल पहुंचाया

विदेश मंत्रालय में 24 घंटे कंट्रोल रूम एक्टिव है, काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में 24x7 हेल्पलाइन से भारतीयों-नेपालियों को मदद दी जा रही है।

क्लाइमेट चेंज को बताया वजह

PM शाह ने कहा - भोटेकोशी नदी के रास्ते रसुवा में घुसा पानी सामान्य बारिश नहीं, हिमालय में तेजी से पिघलते ग्लेशियर और क्लाइमेट चेंज का नतीजा है। नेपाल जैसे पहाड़ी देश प्रदूषण में नाममात्र हिस्सेदार हैं, फिर भी सबसे बड़ा खामियाजा भुगत रहे हैं। उन्होंने UN से ग्लोबल आपदा रिस्पांस सिस्टम बनाने की अपील की।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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