PoK में बगावत: JAAC का 15 जुलाई को पाकिस्तान की असेंबली से 'आजादी' का ऐलान, 17 हजार सेना तैनात
PoK में JAAC के नेतृत्व में भारी प्रदर्शन हो रहा है। समिति ने 15 जुलाई को पाकिस्तान की असेंबली से आजादी का ऐलान करने की बात कही है। फायरिंग में 30 लोगों की मौत के बाद रावलकोट में 17 हजार सेना तैनात है। प्रदर्शनकारी महंगाई, बिजली और 12 आरक्षित सीटों को लेकर 38 मांगें लेकर सड़कों पर हैं।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में हालात तेजी से बिगड़ गए हैं। 'जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' JAAC के नेतृत्व में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। JAAC ने 15 जुलाई को पाकिस्तान की असेंबली से आजादी का ऐलान करने की घोषणा की है।
समिति ने कहा, "PoK के लोग 15 जुलाई को पाकिस्तान की असेंबली से आजादी का ऐलान करेंगे।" साथ ही स्थानीय नेताओं ने पाकिस्तानी सेना को फौरन शहर खाली करने का अल्टीमेटम भी दिया है।
जालियावाला बाग जैसी फायरिंग का आरोप
हालात तब बिगड़े जब पिछले दिनों एक प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सेना ने निहत्थे लोगों पर फायरिंग कर दी। इसमें 30 प्रदर्शनकारियों की मौके पर मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों ने इसकी तुलना 'जालियावाला बाग' नरसंहार से की है। इसके बाद हुई हिंसक झड़पों में 4 पुलिसकर्मियों की मौत और 174 लोगों के घायल होने की खबर है।
17 हजार जवान तैनात, भारी तनाव
पाकिस्तान ने विरोध का केंद्र बने रावलकोट में 17 हजार से ज्यादा सैनिक भेजे हैं। सेना ने प्रदर्शनकारियों को चारों तरफ से घेर रखा है। स्थानीय प्रशासन ने 27 जुलाई के विधानसभा चुनाव से पहले सख्ती के लिए अतिरिक्त बलों की मांग की है।
JAAC ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। इसके बाद रावलकोट, मुजफ्फराबाद, पुंछ और अब्बासपुर में बड़े पैमाने पर रैलियां और धरने शुरू हो गए हैं। 15 जुलाई से पहले राजधानी मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च की तैयारी है।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें
1. 38-सूत्रीय आर्थिक मांगे: महंगाई, आटा-दाल की किल्लत और PoK का आर्थिक दोहन बंद हो। PoK में बनने वाली बिजली का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के पंजाब को सस्ते में भेजा जाता है, जबकि स्थानीय लोगों को महंगी बिजली मिलती है।
2. 12 आरक्षित सीटें खत्म हो: शरणार्थियों के लिए आरक्षित विधानसभा की 12 सीटों को खत्म करने की मांग। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन सीटों से इस्लामाबाद चुनाव में हेरफेर करता है।
JAAC ने विदेशी मीडिया को भी आमंत्रित किया है ताकि वे पाकिस्तानी सेना के कथित अत्याचार देख सकें।
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