JDU में अंदरूनी घमासान: नीतीश के बाद पार्टी में खींचतान, छोटू सिंह पर 6 साल का निलंबन
JDU में गुटबाजी और अनुशासनहीनता के आरोपों के बीच पार्टी ने अरविंद उर्फ छोटू सिंह को 6 साल के लिए सस्पेंड किया। वजह अशोक चौधरी से मुलाकात और पार्टी लाइन से अलग बयान बताया जा रहा है। नीतीश के बाद संजय झा गुट के मजबूत होने से ललन सिंह समर्थकों की अनदेखी की बात भी सामने आ रही है।
अनुशासन के लिए पहचान रखने वाली JDU इन दिनों अंदरूनी विवादों से जूझ रही है। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने के बाद पार्टी में गुटबाजी साफ दिखने लगी है।
पिछले कुछ हफ्तों में JDU कार्यालय में नारेबाजी, धक्का-मुक्की और नेतृत्व विरोधी पोस्टर तक देखने को मिले। इसी बीच पार्टी ने वरिष्ठ नेता अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह को 6 साल के लिए निलंबित कर दिया है। इसे पार्टी विरोधी बयान देने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।
अशोक चौधरी के साथ मुलाकात बनी वजह
पार्टी सूत्रों का कहना है कि निलंबन का कारण सिर्फ बयान नहीं है। छोटू सिंह का हाल ही में मंत्री अशोक चौधरी के साथ बिलौटी गांव जाकर भरत तिवारी से मिलना नेतृत्व को नागवार गुजरा। इसे सरकार के खिलाफ रुख के तौर पर देखा गया।
पहले भी छोटू सिंह और धीरज कुशवाहा ने नीतीश के सामने संजय गांधी पर पद बेचने का आरोप लगाया था। लेकिन धीरज कुशवाहा पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
संजय झा का बढ़ता दबदबा
JDU में अब कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। नए संगठन में ललन सिंह के करीबी माने जाने वाले अंजनी सिंह, संतोष कुशवाहा और राजीव मेहता को जगह नहीं मिली। छोटू सिंह को भी ललन सिंह का समर्थक माना जाता है, इसलिए उनके निलंबन को इसी सियासी समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
नीतीश के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव के बाद संजय झा, ललन सिंह, संजय गांधी और उमेश कुशवाहा का रसूख पार्टी में बढ़ गया है। इसी कारण पुराने नेताओं को किनारे किए जाने की चर्चा भी तेज है।
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