बिहार में SC आरक्षण में कोटे में कोटा पर घमासान - संतोष सुमन ने चिराग समेत दलित नेताओं से पूछे 8 सवाल, SC के फैसले का दिया हवाला

बिहार में SC आरक्षण में वर्गीकरण को लेकर सियासत तेज है। HAM नेता और मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि हम आरक्षण खत्म करने की नहीं, सबसे वंचितों को हक दिलाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त 2024 के फैसले का हवाला दिया जिसमें SC के भीतर उप-वर्गीकरण को संवैधानिक बताया गया है। हरियाणा, आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए उन्होंने पूछा - दूसरे राज्यों में वर्गीकरण हो सकता है तो बिहार में क्यों नहीं। उन्होंने OBC/EBC बंटवारे और आंकड़ों पर 8 तीखे सवाल पूछे हैं।

Sep 13, 2026 - 18:24
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बिहार में SC आरक्षण में कोटे में कोटा पर घमासान - संतोष सुमन ने चिराग समेत दलित नेताओं से पूछे 8 सवाल, SC के फैसले का दिया हवाला

पटना - बिहार में अनुसूचित जाति आरक्षण में कोटे में कोटा को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। जीतन राम मांझी के बेटे और मंत्री संतोष सुमन सबसे आगे हैं।

संतोष सुमन ने कहा - "SC वर्गीकरण से आरक्षण खत्म होने का झूठ कौन फैला रहा है? हम आरक्षण खत्म नहीं, आरक्षण के अंदर सबसे वंचित को उसका हक दिलाने की मांग कर रहे हैं। इसे खत्म करने का नाम देकर गरीबों को डराना बंद कीजिए।"

सुप्रीम कोर्ट का हवाला
सुमन ने कहा 1 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने SC के भीतर उप-वर्गीकरण को तर्कसंगत आधार और आंकड़ों के साथ संवैधानिक माना है। फिर बिहार में इसे आरक्षण खत्म करने से क्यों जोड़ा जा रहा है?

उन्होंने उदाहरण दिए - हरियाणा में SC के 20% को 10% वंचित और 10% अन्य में बांटा गया है। आंध्र में 15% को 1%, 6.5%, 7.5% में, तेलंगाना में 1%, 9%, 5% में, कर्नाटक में 6%,6%,5% में और तमिलनाडु में अरुंधतियार के लिए विशेष कोटा है। कुल आरक्षण खत्म नहीं हुआ, बंटवारा न्यायपूर्ण हुआ।

संतोष सुमन के 8 सवाल
1. OBC-1 और OBC-2 का वर्गीकरण गलत है क्या?
2. OBC और EBC को अलग रखना सामाजिक न्याय के खिलाफ है?
3. क्या SC के सभी समुदायों के सामाजिक-शैक्षणिक-आर्थिक और नौकरियों में प्रतिनिधित्व के आंकड़े सामने लाने को तैयार हैं?
4. दशकों बाद भी किसी SC समुदाय की साक्षरता 30% से कम हो तो विशेष प्रयास क्यों नहीं?
5. क्या बच्चे सिर्फ आरक्षण पर रहें या शिक्षा-योग्यता-कौशल से आगे बढ़ें?
6. वर्गीकरण का विरोध है तो सबसे पीछे छूटे समुदायों के लिए आपका मॉडल क्या है?
7. आंकड़े अगर वंचना साबित करें तो लक्षित नीति का समर्थन करेंगे?
8. सबसे कमजोर SC तक लाभ नहीं पहुंचा तो न्यायपूर्ण हिस्सेदारी का समर्थन करेंगे या नहीं?

सुमन ने कहा - "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी का नारा था तो SC के भीतर आंकड़ों के आधार पर हिस्सेदारी से डर क्यों? आंकड़ों से बात होगी, आरोप से नहीं।"

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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