बिहार बाढ़ पर सियासत तेज - 48 लाख प्रभावित, तेजस्वी ने बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और विशेष पैकेज की मांग की
बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर है, 15 जिलों के 575 पंचायतों में 48.22 लाख लोग प्रभावित हैं। गंगा, कोसी, गंडक खतरे के निशान से ऊपर हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर सौतेला व्यवहार का आरोप लगाते हुए बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने, विशेष पैकेज और सेना-वायुसेना से राहत की मांग की है। उन्होंने कहा कि आकस्मिक निधि से 4000 करोड़ निकाल लिए गए, जबकि गुजरात में बारिश पर PM तुरंत सक्रिय होते हैं। CM सम्राट चौधरी ने BRICS सफलता पर PM को बधाई दी।
पटना - बिहार में बाढ़ का संकट गहरा गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार 15 जिलों के 87 प्रखंडों की 575 पंचायतों में 48.22 लाख लोग प्रभावित हैं। शुक्रवार तक यह आंकड़ा 47.33 लाख था।
प्रभावित जिले - पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, अररिया। सितंबर में अब तक 108.8 MM बारिश हुई है जो सामान्य से 20% ज्यादा है। गंगा सुल्तानगंज में खतरे के निशान से 1.98 मीटर ऊपर है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती, घाघरा भी उफान पर हैं।
तेजस्वी का हमला
RJD के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। उन्होंने PM, CM और डिप्टी CM को पत्र लिखा था लेकिन जवाब नहीं मिला।
तेजस्वी ने आरोप लगाया - "डबल इंजन के दोनों इंजन में आग लगी है, खजाना खाली है। आपदा से पहले आकस्मिक निधि से 4000 करोड़ निकालकर सामान्य योजनाओं में खर्च कर दिया। नीतीश कहते थे खजाने पर पहला हक आपदा पीड़ितों का है, अब वह सिद्धांत कहां गया?"
उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए केंद्र पर भेदभाव का आरोप लगाया - गुजरात में बारिश पर PM तुरंत CM से बात करते हैं, राहत घोषित होती है, वायुसेना लगती है, बिहार में 45 लाख प्रभावित होने पर भी गंभीरता नहीं। बिहार के 30 से ज्यादा NDA सांसद और कई केंद्रीय मंत्री होने पर भी विशेष सहायता नहीं ला पा रहे।
तेजस्वी ने कानून-व्यवस्था और राजद जिला उपाध्यक्ष की हत्या का मुद्दा भी उठाया।
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