पटना शिक्षक MLC चुनाव में फंसा NDA का पेंच, 7th Pay और एरियर बना बड़ा मुद्दा, जनसुराज ने बढ़ाई टेंशन
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इस बार NDA के लिए आसान नहीं है। बीजेपी MLC नवल किशोर यादव के सामने एंटी-इंकंबेंसी, 7वें वेतनमान और 8 साल के एरियर का मुद्दा भारी पड़ रहा है। जनसुराज और महागठबंधन के संभावित उम्मीदवार डॉ. संजीव की एंट्री से मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है।
पटना - पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। NDA भले ही रिकॉर्ड जीत का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कह रही है। जनसुराज की संभावित एंट्री से NDA और महागठबंधन दोनों खेमों में हलचल तेज हो गई है।
हालांकि अभी तक जनसुराज या महागठबंधन ने आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन सत्ताधारी दल के खिलाफ शिक्षकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
सबसे बड़ा मुद्दा - सातवां वेतनमान
बिहार के शिक्षकों में सबसे ज्यादा गुस्सा 7th Pay Commission का लाभ न मिलने को लेकर है। राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बावजूद शिक्षकों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है, जबकि चपरासी से लेकर अन्य कर्मचारियों को इसका लाभ मिल रहा है। शिक्षकों का कहना है कि अगर वेतनमान लागू होता है तो सैलरी में 15 हजार रुपये तक का इजाफा होगा, साथ ही DA और HRA का अंतर भी खत्म होगा। 8 साल से एरियर न मिलने से भी शिक्षक खफा हैं।
महागठबंधन का दांव
महागठबंधन से डॉ. संजीव का नाम सबसे आगे चल रहा है। जदयू के पूर्व विधायक रहे डॉ. संजीव ने पार्टी में रहते हुए ही भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिस वजह से एक बड़ा शिक्षक वर्ग खासकर मुस्लिम और यादव समुदाय उनके समर्थन में आ रहा है। मौजूदा बीजेपी MLC नवल किशोर यादव को इस वोट बैंक के खिसकने से नुकसान हो सकता है।
जनसुराज बना नया फैक्टर
बांकीपुर उपचुनाव में जीत के बाद जनसुराज की पैठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी बढ़ी है। शिक्षा, नौकरी और सम्मानजनक माहौल के मुद्दे पर जनसुराज नए वोटरों में पकड़ बना रहा है। पुराने शिक्षक अभी भी नवल किशोर यादव के साथ हैं, जबकि नए शिक्षक जनसुराज और डॉ. संजीव की ओर झुकते दिख रहे हैं।
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