नीति आयोग रिपोर्ट पर बिहार में सियासी बवाल, रोहिणी आचार्य बोलीं- 100 में 41.2 अंक, 17 राज्यों में सबसे नीचे, 21 साल बाद भी NDA का विकास मॉडल फेल क्यों?

नीति आयोग के 'इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स 2026' में बिहार की खराब रैंकिंग पर सियासत गरमाई। बिहार 100 में 41.2 अंक के साथ 17 बड़े राज्यों में 17वें और 36 राज्यों/UT में 26वें स्थान पर। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने X पर पोस्ट कर NDA सरकार पर हमला बोला, पूछा- 21 साल सत्ता में रहने के बाद भी विकास मॉडल फेल क्यों? आरोप लगाया- मजबूत औद्योगिक आधार नहीं बना, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जमीन पर नहीं, भ्रष्ट नौकरशाही, लालफीताशाही और देरी ने निवेशकों को हतोत्साहित किया, असर रोजगार पर। विपक्ष ने भी रिपोर्ट को लेकर सरकार को घेरा।

Sep 02, 2026 - 18:42
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नीति आयोग रिपोर्ट पर बिहार में सियासी बवाल, रोहिणी आचार्य बोलीं- 100 में 41.2 अंक, 17 राज्यों में सबसे नीचे, 21 साल बाद भी NDA का विकास मॉडल फेल क्यों?
नीति आयोग रिपोर्ट पर बिहार में सियासी बवाल, रोहिणी आचार्य बोलीं- 100 में 41.2 अंक, 17 राज्यों में सबसे नीचे, 21 साल बाद भी NDA का विकास मॉडल फेल क्यों?

पटना: नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट को लेकर बिहार में सियासी बवाल तेज हो गया है। 'इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स 2026' में बिहार के खराब प्रदर्शन पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। इसी कड़ी में RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने NDA सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।

रोहिणी ने X पर क्या लिखा?

रोहिणी ने पोस्ट कर कहा - ये रिपोर्ट बिहार के विकास के दावों की पोल खोलती है।

बिहार को 100 में सिर्फ 41.2 अंक मिले हैं
17 बड़े राज्यों में 17वें नंबर पर - सबसे नीचे
देश के 36 राज्यों/UT में 26वें स्थान पर

रोहिणी ने सवाल उठाया - 21 साल से सत्ता में रहने के बाद भी NDA का विकास मॉडल फेल क्यों है?

भ्रष्ट नौकरशाही और लालफीताशाही का आरोप

रोहिणी ने कहा - दो दशक से ज्यादा सत्ता में रहने के बाद भी सरकार बिहार में न मजबूत औद्योगिक आधार बना पाई, न निवेश के अनुकूल माहौल। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सिर्फ कागजों पर है। भ्रष्ट नौकरशाही, लालफीताशाही और सरकारी फाइलों में अनावश्यक देरी ने बिहार को निवेशकों के लिए हतोत्साहित करने वाला राज्य बना दिया है। इसका सीधा असर निवेश, उद्योग और रोजगार सृजन पर पड़ रहा है।

विपक्ष मुखर

रोहिणी ने कहा - 20 साल से ज्यादा का समय किसी भी सरकार के लिए अपनी नीतियों का परिणाम दिखाने को काफी है। फिर भी बुनियादी मानकों पर सबसे नीचे रहना विकास के दावों की हकीकत दिखाता है। दावे बड़े, जमीनी हकीकत उसके उलट। रिपोर्ट के बाद सम्राट चौधरी सरकार समेत NDA की पूर्व सरकारों पर भी सवाल उठ रहे हैं और सियासी घमासान और बढ़ने के आसार हैं।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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