जेल, AK-47 केस और पार्टी से निकाले जाने के बाद भी कैसे और मजबूत हो जाते हैं अनंत सिंह? पुटूस हत्याकांड से लेकर बरी होने तक की कहानी

मोकामा के बाहुबली अनंत सिंह की खासियत जब भी प्रशासन शिकंजा कसता है राजनीतिक रूप से और ताकतवर हो जाते हैं, पुटूस हत्याकांड 2015 में JDU से निकाले जाने के बाद निर्दलीय 20 हजार वोटों से जीत, AK-47 केस में 10 साल सजा विधायकी गई फिर 2024 में हाईकोर्ट से बरी और 2025 में 28 हजार वोटों से जीत, भूमिहार एकजुटता, सहानुभूति और रॉबिनहुड छवि है वजह।

Oct 26, 2026 - 20:47
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जेल, AK-47 केस और पार्टी से निकाले जाने के बाद भी कैसे और मजबूत हो जाते हैं अनंत सिंह? पुटूस हत्याकांड से लेकर बरी होने तक की कहानी

मोकामा। इसे किस्मत कहें या मोकामा में छोटे सरकार कहे जाने वाले अनंत सिंह की भावनात्मक पकड़, उनके करियर की सबसे अजीब बात यही है - जब भी आपराधिक मामले में प्रशासन चूलें कसता है, वे राजनीतिक रूप से और ताकतवर बनकर उभरते हैं। ये खूबी उन्हें नीतीश कुमार के बराबर खड़ा करती है, जब-जब नीतीश को कमजोर समझा गया वे मजबूत हुए, वैसी ही शख्सियत अनंत सिंह की है।

संकट में ही चमकते हैं अनंत सिंह

बिहार के बाहुबली की राजनीति अपराध की परछाई से कभी मुक्त नहीं हुई, लेकिन हर शिकंजे ने उन्हें बड़ा बनाया।

केस 1: पुटूस हत्याकांड 2015 - निकाले गए, निर्दलीय जीते

18 जून 2015 को पटना के बाढ़ थाना क्षेत्र में पुटूस हत्याकांड हुआ। 17 जून को बाढ़ बाजार से पवन कुमार उर्फ पुटूस यादव और उसके 3 दोस्त प्रदीप, सोनू, बबलू का अपहरण हुआ, आरोप था लड़की से छेड़छाड़ का। कहा जाता है लड़की अनंत सिंह के करीबी की थी। 3 लड़कों को छोड़ा गया, पुटूस की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। शव अनंत सिंह के पैतृक गांव लदमा के पास खेत से मिला। पिता कपिलदेव यादव ने अनंत सिंह पर साजिश का आरोप लगाया।

तब महागठबंधन की रैली में लालू यादव ने अनंत सिंह को जेल भेजने की बात कही थी। अगस्त 2015 में बेऊर जेल गए। तब वे JDU विधायक थे, पार्टी ने निकाल दिया। लेकिन 2015 विधानसभा में निर्दलीय लड़े और JDU के नीरज कुमार को 20 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर चौथी बार विधायक बने।

केस 2: AK-47 कांड - 10 साल सजा, विधायकी गई, फिर बरी होकर वापसी

दूसरा बड़ा केस AK-47 कांड। अनंत सिंह ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री RCP सिंह की बेटी IPS लिपि सिंह पर साजिश का आरोप लगाया था। पटना ग्रामीण SP कांतेश मिश्रा और ASP लिपि सिंह ने लदमा पैतृक घर पर छापेमारी में AK-47, 26 कारतूस, मैगजीन और 2 हैंड ग्रेनेड बरामद दिखाए।

21 जून 2022 को MP-MLA कोर्ट ने 10 साल कैद सुनाई, विधायकी चली गई। लेकिन 14 अगस्त 2024 को पटना हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। और 2025 विधानसभा में फिर उतरे और RJD की वीणा देवी को 28 हजार वोटों से हराया।

क्यों हर बार कमबैक कर जाते हैं? 3 बड़े कारण

1. भूमिहार फैक्टर: मोकामा में भूमिहार बहुल है, अनंत खुद भूमिहार हैं। संकट आते ही पूरा समुदाय एकजुट हो जाता है।

2. सहानुभूति लहर: जब समर्थकों को लगता है कि राजनीतिक रूप से फंसाया जा रहा है तो सवर्ण, पिछड़े, दलित सभी में सहानुभूति बनती है।

3. रॉबिनहुड छवि: मुसीबत में जो आया दिल खोलकर मदद, शादियों में आर्थिक सहयोग, सामाजिक विवादों को तुरंत सुलझाना। इसी से सीधा जनाधार जुड़ा है।

अब JDU से 6 साल के निष्कासन के बाद फिर वही सवाल - क्या अनंत सिंह इस बार भी और मजबूत होकर उभरेंगे?

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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