DGP विनय कुमार का VRS लेते ही CIC बनना इत्तेफाक नहीं! बिहार में रिटायरमेंट के बाद 'एडजस्टमेंट' का पुराना खेल

बिहार में DGP विनय कुमार के VRS लेकर तुरंत मुख्य सूचना आयुक्त बनने पर चर्चा तेज है, लेकिन ये कोई नई बात नहीं। बिहार में रिटायरमेंट के बाद ब्यूरोक्रेट्स को एडजस्ट करने का लंबा इतिहास रहा है। मुख्य सचिव से लेकर DGP तक कई बड़े अफसरों को रिटायरमेंट के बाद बड़े पद मिले हैं।

Sep 27, 2026 - 18:32
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DGP विनय कुमार का VRS लेते ही CIC बनना इत्तेफाक नहीं! बिहार में रिटायरमेंट के बाद 'एडजस्टमेंट' का पुराना खेल

पटना। बिहार में रिटायरमेंट के बाद ब्यूरोक्रेट का एडजस्ट होना आज की बात नहीं है। DGP विनय कुमार ने उधर VRS लिया, इधर मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) बनने की खबर आ गई। इस पर हंगामा मच गया, लेकिन हकीकत ये है कि बिहार में ऐसी एडजस्टमेंट पहले भी होती रही हैं और आगे भी होती रहेंगी।

योग्यता या वफादारी?

अधिकारी को किस आधार पर एडजस्ट किया जाता है - योग्यता, कार्यक्षमता, सरकार के प्रति विश्वसनीयता या उनमें बची ताकत का इस्तेमाल? ये तो सरकार ही जाने, लेकिन एडजस्टमेंट का खेल जारी है।

बिहार में एडजस्ट होने वाले बड़े नाम - लिस्ट देखिए:

1. बृजेश मेहरोत्रा (पूर्व मुख्य सचिव): रिटायरमेंट के बाद राज्य सूचना आयुक्त बनाए गए।
2. विनय कुमार (पूर्व DGP): VRS लेते ही बिहार के नए मुख्य सूचना आयुक्त बने।
3. रवि मनु भाई परमार (IAS): बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष बने।
4. विवेक कुमार सिंह (IAS): रिटायरमेंट के बाद RERA जैसे पावरफुल पद पर बैठाए गए।
5. एसके सिंघल (पूर्व DGP): सिपाही भर्ती बोर्ड (CSBC) के अध्यक्ष बने।

मुख्य सचिव रहे अफसरों का तो क्या ही कहना:

दीपक कुमार: 2018 से 2021 तक मुख्य सचिव रहे। रिटायर होते ही CM नीतीश कुमार के प्रधान सचिव बन गए।
आमिर सुबहानी: दिसंबर 2021 से 2024 तक मुख्य सचिव रहे। VRS के तुरंत बाद BERC के अध्यक्ष बना दिए गए।
त्रिपुरारी शरण, अशोक कुमार सिन्हा, अशोक कुमार चौधरी: सभी मुख्य सचिव से रिटायर होने के बाद मुख्य सूचना आयुक्त बने।

अब तो बन गया 'एडजस्टमेंट पैनल'

अब सरकार ने इसे संस्थागत रूप दे दिया है। सितंबर 2026 में आई नई व्यवस्था के अनुसार, अब सेवारत IAS अफसरों पर होने वाली विभागीय जांच की जिम्मेदारी 65 साल से कम उम्र के रिटायर्ड IAS अफसरों के विशेष पैनल को दी जा रही है।

यानी अब रिटायर्ड अफसर ही मौजूदा अफसरों की जांच करेंगे। बिहार में मुख्य सूचना आयुक्त, BPSC, बिजली आयोग, भर्ती बोर्ड जैसे सभी बड़े पदों पर अब रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स की ही ताजपोशी तय मानी जा रही है।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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