भ्रष्टाचार पर 'एंटीबायोटिक' का दावा करने वाले मंत्री के फैसले पर सवाल, हटाए गए CO को फिर मिली वही पोस्टिंग
बिहार के राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल पर CO के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सवाल। पालीगंज से हटाए गए CO महेश कुमार के खिलाफ आरोप पत्र मंजूर करने के बाद 6 अगस्त को फिर से उसी अंचल में पोस्टिंग दे दी गई। कथनी और करनी में फर्क का आरोप।
पटना: राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल के भ्रष्टाचार विरोधी दावों पर सवाल उठ रहे हैं। अंचलाधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर विभाग के फैसले से कथनी और करनी में फर्क दिख रहा है।
क्या है पूरा मामला?
30 जून 2026 को विभाग ने अंचलाधिकारियों का तबादला किया। इसमें पटना के पालीगंज अंचल के CO महेश कुमार को हटाकर शिवहर में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया। उन पर बीएलटी आदेश का अनुपालन न करने का आरोप था।
20 जुलाई को मंत्री ने मीडिया रिलीज जारी कर कहा कि महेश कुमार समेत कई अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र गठित करने की मंजूरी दी गई है। मंत्री ने कहा था कि भ्रष्टाचार, अनियमितता और लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। अब तक 67 अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है।
6 अगस्त को फिर वही पोस्टिंग
लेकिन 6 अगस्त को विभाग ने 20 राजस्व अधिकारियों का फिर से ट्रांसफर किया। इसी लिस्ट में हटाए गए CO महेश कुमार को वापस पालीगंज अंचलाधिकारी बना दिया गया।
विपक्ष और सवाल
आरोप लग रहे हैं कि एक तरफ मंत्री खुद को 'भ्रष्टाचार का डॉक्टर' बताकर 'एंटीबायोटिक' देने की बात करते हैं, दूसरी तरफ शिकायत के बाद हटाए गए अधिकारी को जांच के बीच ही फिर से पुरानी जगह पर तैनात कर दिया जाता है। इससे मंत्री की 'करप्शन रोकने' की थ्योरी पर ही प्रश्नचिन्ह लग गया है।
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