वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग की दो टूक सफाई, कहा- ज्ञानेश कुमार के फैसले पर कोई मतभेद नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी माना सही
वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर उठ रहे सवालों पर चुनाव आयोग ने सफाई दी है। आयोग ने कहा है कि बिहार-असम समेत कई राज्यों में जारी रिवीजन ऑर्डर पर कोई विवाद नहीं है और सभी फैसले CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। फॉर्म-6 के साथ डिक्लेरेशन लेना पूरी तरह वैध है।
नई दिल्ली/पटना। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आदेशों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष वोटर लिस्ट से नाम काटने का आरोप लगा रहा है। अब इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग ने खुद सामने आकर सफाई दी है।
आयोग के सूत्रों ने साफ किया है कि बिहार और असम समेत कई राज्यों में जारी SIR (Special Intensive Revision) ऑर्डर पर कोई विवाद नहीं है।
सभी फैसले सहमति से लिए गए
चुनाव आयोग ने कहा है कि रिवीजन को लेकर लिए गए सभी फैसलों को चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों ने पूरी सहमति से मंजूरी दी थी। इसमें किसी भी तरह का कोई मतभेद नहीं है।
आयोग ने ये भी साफ किया कि नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के साथ डिक्लेरेशन फॉर्म लेना पूरी तरह से वैध है।
कानून और सुप्रीम कोर्ट का हवाला
चुनाव आयोग का कहना है कि यह व्यवस्था जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 की धारा 21(3) के तहत लागू की गई है। ये नियम पूरी तरह सही है और देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कानूनी प्रावधान को बरकरार रखा है।
दरअसल, विपक्ष आरोप लगा रहा था कि ज्ञानेश कुमार अकेले फैसले ले रहे हैं और बॉम्बे हाईकोर्ट में तो उनके आदेश को रद्द करने और काटे गए नामों को बहाल करने की मांग तक की गई है।
पटना से लेकर पंजाब तक कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया, जहां पुलिस को वाटर कैनन चलानी पड़ी। इसी बीच खबर है कि CEC का यूपी दौरा भी रद्द हो गया है, जहां उन्हें 2 शहरों में Gen-Z को संबोधित करना था।
सूत्रों की मानें तो विपक्ष अब CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में भी है।
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