FCRA संशोधन बिल 2026 पर संसद में हंगामा...विपक्ष बोला- अल्पसंख्यकों को निशाना
मॉनसून सत्र में FCRA संशोधन विधेयक 2026 पर जमकर बवाल। कांग्रेस, सपा और DMK ने बिल वापस लेने की मांग की। सरकार ने कहा- एक भी प्रावधान अल्पसंख्यक विरोधी नहीं। बिल संयुक्त समिति को भेजा गया, 31 सदस्य 2026 शीतकालीन सत्र तक देंगे रिपोर्ट।
नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र में विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए। हंगामे के बीच बिल को संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया।
विपक्ष का आरोप: अल्पसंख्यकों को निशाना
बिल का विरोध करते हुए कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह NGO और अल्पसंख्यक संस्थानों को टारगेट करने के लिए लाया गया है। इसे वापस लिया जाए।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, पूरा विपक्ष इस बिल के खिलाफ है। सरकार बताएं आज तक कौन सा बिल लाई है जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं हो।
DMK नेता टीआर बालू ने भी विधेयक वापस लेने की मांग की।
सरकार का जवाब: देश की सुरक्षा से जुड़ा है
अल्पसंख्यक और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी आरोप खारिज किए। बोले, इसमें एक भी प्रावधान ऐसा नहीं है जो किसी समुदाय के खिलाफ हो। किसी को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं। रिजिजू ने कहा कि अगर विपक्ष को आपत्ति है तो वो संयुक्त समिति में अपनी बात रखे। आपने ही समिति को भेजने की मांग की थी, अब आपत्ति क्यों?
क्या है आगे की प्रक्रिया?
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के प्रस्ताव पर बिल को संयुक्त समिति को भेजा गया।
31 सदस्यीय समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सांसद होंगे। समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक रिपोर्ट सौंपनी है।
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