जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं, फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, याचिका में कहा - मौलिक अधिकारों पर हमला

दिल्ली में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती। 11 अक्टूबर को जारी दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर को मनमाना और प्रक्रिया में खामी वाला बताया गया। याचिका में दलील - प्रदर्शनों को दूर-दराज भेजने से अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और 19(1)(b) शांतिपूर्ण सभा का अधिकार खत्म होगा। 2018 के मजदूर किसान शक्ति संगठन vs भारत संघ फैसले का हवाला, कहा नए 3 स्थलों की SOP तक जारी नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट 15 अक्टूबर को सुनवाई की तारीख तय कर सकता है। उसी दिन CEC ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले मेट्रो-ट्रेन बंद करने और 8 अक्टूबर के आदेश की अवमानना वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।

Oct 14, 2026 - 18:25
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जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं, फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, याचिका में कहा - मौलिक अधिकारों पर हमला

नई दिल्ली। अब जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन करना भूल जाइए। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा कर 3 नई जगहें तय की हैं। इसी फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

11 अक्टूबर को जारी स्टैंडिंग ऑर्डर को याचिका में मनमाना और प्रक्रिया संबंधी खामियों से ग्रस्त बताया गया है। माना जा रहा है सुप्रीम कोर्ट 15 अक्टूबर को सुनवाई की तारीख तय कर सकता है।

याचिका में क्या दलील?

याचिकाकर्ता का कहना है दूर-दराज के इलाकों में प्रदर्शन भेजने से नागरिकों के मौलिक अधिकार खत्म होंगे।

अनुच्छेद 19(1)(a) - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 19(1)(b) - शांतिपूर्ण सभा करने का अधिकार

दलील है कि प्रदर्शन को शहर से बाहर करने से ये अधिकार प्रभावहीन हो जाएंगे।

याचिका में 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले - मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ का भी हवाला दिया गया है। साथ ही कहा गया है नए 3 प्रदर्शन स्थलों के लिए संशोधित SOP तक जारी नहीं हुई है।

मेट्रो-ट्रेन बंद करने पर भी कल सुनवाई

इसी के साथ 15 अक्टूबर को दो और अहम याचिकाओं पर सुनवाई होगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और वोटर लिस्ट के SIR के खिलाफ 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों से पहले दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेन सेवाओं में व्यवधान पर।

सुप्रीम कोर्ट ने 8 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो, रेलवे सेवाओं पर लगी पूर्ण पाबंदी हटाने का आदेश दिया था। अब याचिका है कि अधिकारियों ने उस आदेश की अवमानना की है, उन पर कार्रवाई हो।

केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगा गया है।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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