CJP प्रोटेस्ट से पहले दिल्ली पुलिस का एक्शन, फाउंडर अभिजीत दीपके समेत 3 हिरासत में, कब कर सकती है पुलिस लाठीचार्ज-आंसू गैस का इस्तेमाल?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया। भीड़ जमा होने पर पुलिस क्या-क्या कदम उठा सकती है, जानिए नियम। पुलिस का सिद्धांत है- जरूरत, अनुपात और कम से कम बल। पहले चेतावनी, बैरिकेडिंग, फिर वॉटर कैनन, आंसू गैस और आखिरी में लाठीचार्ज व कम घातक हथियारों का इस्तेमाल। असली गोली सिर्फ जान को तुरंत खतरा होने पर।
नई दिल्ली। CJP के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सख्ती दिखाई है। CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचते ही हिरासत में ले लिया गया। ये प्रदर्शन CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग को लेकर होना था।
भीड़ काबू करने के लिए पुलिस के पास क्या अधिकार हैं, आइए जानते हैं।
1. कम से कम बल का सिद्धांत
पुलिस की कार्रवाई हिंसा से शुरू नहीं होती। नियम है- जरूरत, अनुपात और कम से कम बल। सिर्फ इसलिए कि प्रदर्शन असुविधाजनक है, बल प्रयोग सही नहीं है।
2. चेतावनी और तितर-बितर का आदेश
पहला कदम बातचीत। लाउडस्पीकर से जमावड़े को गैरकानूनी बताना, चेतावनी देना और तितर-बितर होने को कहना। बैरिकेड लगाना। BNSS की धारा 148 गैरकानूनी जमावड़े को हटाने और धारा 163 तत्काल आदेशों से जुड़ी है।
3. वॉटर कैनन और आंसू गैस
चेतावनी बेअसर होने और भीड़ बैरिकेड तोड़ने पर वॉटर कैनन का इस्तेमाल। इसके बाद भी स्थिति न संभले और हिंसा जरूरी हो जाए तो आंसू गैस। पुलिस को बच्चों, बुजुर्गों का ध्यान रखना होता है।
4. लाठीचार्ज कब?
लाठीचार्ज सजा नहीं, आखिरी उपाय है। जब बाकी उपाय फेल हों और लोगों की सुरक्षा को खतरा हो। सिर, गर्दन, छाती पर वार से बचना होता है, निकलने का रास्ता देना होता है।
5. रबर बुलेट और असली गोली
कम घातक हथियार भी मंजूरी और गंभीर खतरे पर ही। आंख, चेहरे पर स्थायी चोट का खतरा रहता है। असली गोली सिर्फ जान को तुरंत खतरा होने पर, चेतावनी और मंजूरी के बाद ही चलाई जा सकती है।
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