14वीं JPSC परीक्षा विवादों में, ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को दिया काम...बाबूलाल-जयराम ने सरकार को घेरा
झारखंड में 14वीं JPSC परीक्षा को लेकर सियासत तेज। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और विधायक जयराम महतो ने सरकार और आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। कहा परीक्षा का काम यूपी की ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को सौंपा गया। जयराम महतो ने राज्यपाल और CM से मिलकर शिकायत की। मेंस के लिए सिर्फ 15 दिन का समय देने और परिणाम पर अधिकारी के हस्ताक्षर न होने पर भी सवाल। 22 जुलाई को JPSC कार्यालय घेराव का ऐलान।
झारखंड में 14वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षा को लेकर राजनीति तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और JLKM विधायक जयराम महतो ने राज्य सरकार और आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी का आरोप
दोनों नेताओं का कहना है कि JPSC ने परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को सौंपी है। इसी एजेंसी के जरिए झारखंड में भर्ती परीक्षा कराई जा रही है।
राज्यपाल और CM से मिले जयराम महतो
जयराम महतो ने सोमवार देर रात CM हेमंत सोरेन और मंगलवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की। राजभवन से निकलकर उन्होंने कहा कि 14वीं JPSC PT में हुई गड़बड़ियों की शिकायत राज्यपाल से की है।
15 दिन मेंस कराने पर उठे सवाल
जयराम ने आरोप लगाया कि सरकार और आयोग अपनी खामियों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
"परंपरा के मुताबिक PT के बाद मेंस के लिए 45 दिन का समय मिलता है। लेकिन इस बार सिर्फ 15 दिन दिए गए हैं। इतनी जल्दबाजी विवाद को रफा-दफा करने के लिए की जा रही है।"
उन्होंने अफसरशाही पर भी हमला बोला और कहा कि राज्य में अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनते और व्यवस्था में पारदर्शिता का अभाव है।
बाबूलाल मरांडी ने क्या कहा?
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि परीक्षा परिणाम जारी तो कर दिया गया, लेकिन उस पर सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर तक नहीं हैं। अभ्यर्थियों को OMR शीट नहीं दी गई और RTI के जवाब भी संतोषजनक नहीं हैं।
"जब अफसर चुनने वाली संस्था ही सवालों में हो तो युवाओं का भरोसा कैसे रहेगा?"
इसी मुद्दे को लेकर BJYM के नेतृत्व में 22 जुलाई को JPSC कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
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