बिहार में भ्रष्टाचार पर बड़ा फैसला - महिला सिपाही बेबी कुमारी को 5 साल की सजा, 16.25 लाख जुर्माना, वेतन घोटाले में 35 लाख की आय से अधिक संपत्ति का मामला
मुजफ्फरपुर जिला पुलिस बल की तत्कालीन महिला सिपाही बेबी कुमारी को आय से अधिक संपत्ति मामले में विशेष निगरानी न्यायालय ने 5 साल सश्रम कारावास और 16.25 लाख जुर्माना लगाया, 2012 में 35.42 लाख की DA का केस दर्ज, मामला 2006-2010 के वेतन एसीपी एरियर भुगतान में हेराफेरी से जुड़ा लेखापाल सुशील कुमार चौधरी की भूमिका बैंक खाते बदलकर सरकारी राशि ट्रांसफर, घर से नकदी आभूषण जमीन के कागजात बरामद।
मुजफ्फरपुर। बिहार में भ्रष्टाचार के पुराने मामले में बड़ा फैसला आया है। मुजफ्फरपुर जिला पुलिस बल की तत्कालीन महिला सिपाही बेबी कुमारी को आय से अधिक संपत्ति मामले में 5 साल सश्रम कारावास और 16 लाख 25 हजार जुर्माना की सजा सुनाई गई।
विशेष निगरानी न्यायालय के जज सुमन कुमार दिवाकर ने सोमवार को सजा सुनाई। 5 अक्टूबर को दोषी करार दिया गया था। अभियोजन ने 11 गवाह पेश किए। निगरानी ब्यूरो ने 2012 में 35,42,955 रुपये DA का केस दर्ज किया था।
वेतन भुगतान में गड़बड़ी से जुड़ा है मामला
मामले की जड़ मुजफ्फरपुर पुलिस में करोड़ों के वेतन घोटाले से जुड़ी है। 2006-2010 के बीच पुलिसकर्मियों के वेतन, ACP, एरियर भुगतान में हेराफेरी हुई थी। तत्कालीन लेखापाल सुशील कुमार चौधरी की भूमिका सामने आई थी।
आरोप - वेतन भुगतान में नाम सही रखे जाते थे पर बैंक खातों की जानकारी बदलकर सरकारी राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।
छापेमारी में नकदी और संपत्ति के कागजात मिले
खुलासे के बाद ठिकानों पर छापेमारी में बड़ी मात्रा में नकदी, आभूषण और जमीन निवेश के दस्तावेज बरामद हुए थे। कुछ जगह नकदी घर में छिपाकर रखी थी। बेबी कुमारी के खाते में बड़ी रकम जमा मिलने पर आय-संपत्ति के स्रोत की पड़ताल हुई।
7 धाराओं में सजा, सभी साथ-साथ चलेंगी
अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की धाराओं में दोषी पाया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम - 5 साल + 7.50 लाख जुर्माना
आपराधिक साजिश - 5 साल + 7.50 लाख जुर्माना
अन्य धाराओं - आपराधिक न्यासभंग, धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेज इस्तेमाल में 3-3 साल और अलग जुर्माना
सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त कारावास।
भ्रष्टाचार में कार्रवाई तेज
निगरानी ब्यूरो DG जितेंद्र सिंह गंगवार के अनुसार 2026 में अब तक 22 मामलों में लोकसेवकों को सजा हो चुकी है, जबकि 2000-2024 तक सालाना औसत 5.6 था।
14 साल पुराने मामले में आया फैसला फिर वेतन घोटाले और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर गया।
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