केरल के पूर्व CM Pinarayi Vijayan को Supreme Court से 7 दिन की राहत - CMRL Exalogic 2.78 करोड़ रिश्वत मामले में FIR जांच पर रोक, ED ने भेजी थी रिपोर्ट, HC में अपील का रास्ता खुला
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, बेटी वीणा टी. और दामाद पीए मोहम्मद रियास को CMRL Exalogic कथित रिश्वत मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की अवकाशकालीन पीठ ने बुधवार 21 अक्टूबर 2026 को FIR जांच पर 7 दिन की रोक लगाई। FIR रद्द नहीं, गुण-दोष पर फैसला नहीं, केरल हाईकोर्ट डिवीजन बेंच में अपील की अनुमति। ED ने 2.78 करोड़ के IT कंसल्टेंसी भुगतान का आरोप लगाया, हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को FIR का आदेश दिया था।
नई दिल्ली। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को CMRL Exalogic कथित रिश्वत मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की अवकाशकालीन पीठ ने विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और दामाद पीए मोहम्मद रियास के खिलाफ दर्ज FIR की जांच पर 7 दिनों के लिए रोक लगा दी।
कोर्ट ने साफ किया - FIR रद्द नहीं की गई है और आरोपों के गुण-दोष पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया। सिर्फ उन्हें केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील करने का मौका दिया गया है।
CMRL Exalogic Case क्या है?
मामला कोचिन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और वीणा की कंपनी Exalogic Solutions के बीच वित्तीय लेनदेन का है।
ED का आरोप - CMRL ने Exalogic को IT कंसल्टेंसी के नाम पर अनुचित रकम दी। Bar & Bench की रिपोर्ट में राशि 2.78 करोड़ रुपये बताई गई है। एजेंसी के मुताबिक ये भुगतान केरल सरकार से कंपनी को कथित लाभ पहुंचाने से जुड़ा हो सकता है।
ED ने जांच की सामग्री राज्य पुलिस को भेजी और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई मांगी। इसके बाद केरल हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। एजेंसी ने 2 FIR दर्ज कीं।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
हाईकोर्ट सिंगल बेंच ने ED की जानकारी पर FIR का आदेश दिया और सरकार की प्रारंभिक जांच के तरीके पर सवाल उठाया। विजयन परिवार ने अपील की तो हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर को खारिज कर दिया, कहा - भ्रष्टाचार मामले में FIR से पहले आरोपी को सुनवाई का हक नहीं।
फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
विजयन की दलील क्या थी?
1. सिंगल जज ने FIR से पहले पक्ष नहीं सुना
2. मूल याचिका PIL प्रकृति की थी, डिवीजन बेंच में सुनी जानी चाहिए थी
सुप्रीम कोर्ट ने माना - अपील का अवसर मिलना चाहिए। डिवीजन बेंच के 15 अक्टूबर के आदेश को निरस्त कर अपील का रास्ता खोला और 7 दिन की रोक लगाई।
सुप्रीम कोर्ट ने ED की भूमिका पर भी टिप्पणी की - "किसी एजेंसी को अपने अधिकार-क्षेत्र से आगे नहीं बढ़ना चाहिए।"
आगे क्या होगा?
7 दिन में याचिकाकर्ता हाईकोर्ट डिवीजन बेंच में अपील कर अंतरिम राहत मांग सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश जांच को स्थायी रूप से खत्म नहीं करता, अगला फैसला हाईकोर्ट को लेना है।
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