UP में वोटर लिस्ट पर सियासी घमासान, चुनाव आयोग के विशेष अभियान के बीच Akhilesh Yadav ने उतारे PDA प्रहरी, क्या है 27000 वोट वाला मिशन?

यूपी चुनाव 2027 से पहले वोटर लिस्ट को लेकर हलचल तेज। चुनाव आयोग 17 से 24 अक्टूबर तक विशेष मतदाता पंजीकरण अभियान चला रहा है। अखिलेश यादव ने PDA प्रहरियों को बूथ पर उतार दिया है। सपा का टारगेट - हर विधानसभा में 27 हजार नए वोट जोड़ना, क्योंकि 2022 में 141 सीटें इसी अंतर से हारी थी।

Oct 17, 2026 - 18:59
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UP में वोटर लिस्ट पर सियासी घमासान, चुनाव आयोग के विशेष अभियान के बीच Akhilesh Yadav ने उतारे PDA प्रहरी, क्या है 27000 वोट वाला मिशन?

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले वोटर लिस्ट सबसे बड़ा सियासी हथियार बन गई है।

चुनाव आयोग ने आज 17 अक्टूबर से 24 अक्टूबर 2026 तक विशेष मतदाता पंजीकरण अभियान शुरू किया है, जिसका मकसद 18 साल के हुए नए वोटरों और छूटे हुए पात्र नागरिकों को लिस्ट में जोड़ना है।

और इसी मौके को समाजवादी पार्टी ने पूरी तरह भुनाना शुरू कर दिया है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने अपने 'PDA प्रहरी' को बूथ-बूथ पर एक्टिव कर दिया है।

क्या कर रहे हैं PDA प्रहरी?

अखिलेश यादव ने अपील की है कि हर बूथ पर ये सुनिश्चित किया जाए कि कोई फर्जी या अपात्र नाम न जुड़े और हर पात्र PDA वोटर का नाम लिस्ट में हो।

सपा कार्यकर्ता BLO से वोटर लिस्ट लेकर घर-घर वेरिफिकेशन कर रहे हैं। वे देख रहे हैं -
किसका नाम लिस्ट में है और किसका कटा है?
नाम क्यों कटा?
पात्र वोटर छूटा है तो Form-6 भरवाकर दोबारा जुड़वाना।

इस अभियान की कमान पार्टी प्रवक्ता दीपक रंजन श्रीवास्तव संभाल रहे हैं।

अखिलेश का 27,000 वोट वाला मिशन क्या है?

यही इस पूरी कहानी की सबसे बड़ी बात है।

सपा का इंटरनल कैलकुलेशन कहता है कि 2022 में पार्टी 141 सीटों पर 27 हजार से कम वोटों के अंतर से हारी थी। इसमें 8 सीटें ऐसी थीं जहां हार का अंतर 1000 से भी कम था, और 45 सीटें जहां अंतर 20 से 27 हजार के बीच था।

2022 में BJP को 3.80 करोड़ और सपा को 2.95 करोड़ वोट मिले थे। अंतर करीब 85 लाख वोटों का।

अब सपा का प्लान है - हर विधानसभा में 27,000 अतिरिक्त वोट जोड़ना। 
403 सीट x 27,000 = 1.08 करोड़ नए वोट। अगर ये जुड़ गए तो 2022 वाला गैप खत्म।

इसी के लिए बूथ लेवल टारगेट दिया गया है - हर बूथ से 300 नए वोटर / सदस्य जोड़ो।

आगे क्या?

मतदाता सूची में नाम जोड़ना या हटाना अंतिम रूप से चुनाव आयोग ही करता है। लेकिन बूथ पर इस तरह की निगरानी से सपा को दो फायदे मिलेंगे - अपना कोर PDA वोट बैंक सुरक्षित रखना और BJP पर फर्जी वोटर जोड़ने का आरोप लगाने का मौका।

अब देखना होगा कि चुनाव आयोग के इस 7 दिन के विशेष अभियान में PDA प्रहरी कितने नए नाम जुड़वा पाते हैं।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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