UP में कांग्रेस का नया दांव: OBC पर फोकस, क्या साइकिल का पंचर कर पाएगी हाथ वाली पार्टी?
2027 UP चुनाव से पहले कांग्रेस ने बदली रणनीति। मुस्लिम-ब्राह्मण-दलित से हटकर अब 45% OBC वोट पर नजर। CWC में राम मंदिर चंदा चोरी मुद्दा, राहुल गांधी की 300 OBC जिला अध्यक्षों से बैठक, सोशल जस्टिस कॉन्फ्रेंस। क्या कांग्रेस सपा के यादव और BJP के गैर-यादव वोट बैंक में सेंध लगा पाएगी?
लखनऊ: 2027 UP विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपना सबसे बड़ा दांव चल दिया है। अपना पुराना मुस्लिम-ब्राह्मण-दलित फॉर्मूला छोड़कर पार्टी अब OBC वोट बैंक साधने में जुट गई है। सियासी गलियारे में इसे "साइकिल में पंचर करने" की रणनीति बताया जा रहा है।
कांग्रेस के 5 बड़े संकेत:
1. CWC में राम मंदिर चंदा मुद्दा:
19 अगस्त को दिल्ली में हुई CWC बैठक में कांग्रेस ने राम मंदिर चंदा चोरी को घर-घर ले जाने का फैसला किया। केसी वेणुगोपाल ने इसे 'घर-घर चोरी' बताया। मकसद साफ है - हिंदुत्व पर BJP को उसी के मुद्दे पर घेरना।
2. लखनऊ में OBC की बैठक:
21 अगस्त को लखनऊ PCC में OBC नेताओं की बड़ी बैठक हुई। इससे पहले 18 जुलाई को भी जिला स्तरीय मंथन हुआ था। पार्टी लगातार OBC विंग को एक्टिव कर रही है।
3. राहुल गांधी का OBC जिला अध्यक्षों को मंत्र:
18 अगस्त को राहुल गांधी ने 7 राज्यों के 300 OBC जिला अध्यक्षों के साथ मीटिंग की। UP, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान समेत कई राज्य शामिल। OBC अध्यक्ष अनिल जय हिंद भी मौजूद थे। राहुल ने कहा - शेर सब्र करता है, जल्दबाजी नहीं... सड़क पर उतरना होगा, जातिगत जनगणना को मुद्दा बनाना होगा।
4. सोशल जस्टिस कॉन्फ्रेंस:
कांग्रेस ने 'बहुजन विचार' अभियान शुरू किया। 22 अगस्त को कानपुर और 23 अगस्त को झांसी में कॉन्फ्रेंस। अगले एक महीने तक पूरे UP में सेमिनार और पदयात्रा। फोकस दलित + पिछड़ा पर।
5. जाति जनगणना का नारा:
कांग्रेस ने "जितनी आबादी, उतना हक" नारे के साथ जाति जनगणना में OBC कॉलम की मांग तेज कर दी है। 22 अगस्त से बड़ा अभियान शुरू।
क्यों OBC इतना अहम है?
UP में OBC करीब 45-50%, जिसमें गैर-यादव OBC 35-40% सबसे बड़ा है। दलित 21% और मुस्लिम 19% हैं। 2014 के बाद BJP की जीत का आधार यही गैर-यादव OBC रहा। विश्लेषकों का मानना है कि इसमें 7-8% की भी कटौती BJP के लिए खतरा बन सकती है।
कांग्रेस का पुराना वोट बैंक क्यों बिखरा?
कांग्रेस का ट्रायंगल टूट गया:
मुस्लिम -> सपा के साथ
ब्राह्मण -> बीजेपी के साथ
दलित -> बसपा के साथ, अब बिखराव
अब कांग्रेस नया समीकरण बना रही है - OBC + दलित + अल्पसंख्यक।
किसे होगा नुकसान?
सपा को: अगर गैर-यादव OBC कांग्रेस के साथ गया तो यादव-मुस्लिम समीकरण कमजोर होगा।
बीजेपी को: गैर-यादव OBC में सेंध लगी तो सबसे बड़ा झटका।
लेकिन कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती - UP में संगठन खत्म है और कोई बड़ा OBC चेहरा नहीं। चर्चा है कि जल्द किसी प्रभावशाली OBC नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
कांग्रेस ने जाति जनगणना, शाहू महाराज की विरासत और चंदा चोरी जैसे मुद्दों को एक साथ पकड़ा है। 2027 में OBC ही किंगमेकर होगा, लेकिन सवाल वही है - क्या बिना चेहरे और संगठन के कांग्रेस ये मुश्किल पंचर लगा पाएगी?
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