लखनऊ में 'शतआयु संघ और महिला सहभागिता' पुस्तक पर विशेष परिचर्चा, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल रहीं मुख्य अतिथि
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मर्करी हॉल में 'शतआयु संघ और महिला सहभागिता' पुस्तक पर विशेष परिचर्चा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि रहीं, जबकि निदर्शना गोवानी ने विशिष्ट वक्ता के रूप में राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर अपने विचार रखे।
लखनऊ - राजधानी के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मर्करी हॉल में 'शतआयु संघ और महिला सहभागिता' पुस्तक को लेकर एक भव्य परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहीं। वहीं विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव और पुस्तक की लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
कार्यक्रम में कमला अंकिबाई घमंडीराम गोवानी ट्रस्ट की ट्रस्टी निदर्शना गोवानी ने विशिष्ट वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति का विशेष स्थान है। महिलाएं महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का रूप हैं। महाकाली के रूप में वह परिवार और समाज की रक्षक बनती हैं, महालक्ष्मी के रूप में घर और अर्थव्यवस्था को संभालती हैं और महासरस्वती के रूप में ज्ञान और विवेक की प्रतीक हैं।
निदर्शना गोवानी ने कहा कि महिलाओं की पहचान उनके कपड़ों से नहीं, बल्कि उनके संस्कारों से होती है। स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों के सहयोग से ही समाज में संतुलन आता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारत विकास परिषद जैसे संगठनों ने हमेशा महिलाओं को सम्मान और बराबर अवसर दिए हैं।
कार्यक्रम के अंत में लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र के प्रयासों की सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक समाज में महिलाओं की सक्रिय भूमिका को नई दिशा देने का काम करेगी।
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