क्या अनंत सिंह की जाएगी विधायकी? जानिए 10वीं अनुसूची का पेच
JDU ने मोकामा विधायक अनंत सिंह को पत्नी समेत निकाला और स्पीकर से 10वीं अनुसूची में सदस्यता रद्द करने की मांग की। क्या है दलबदल कानून?
पटना। मोकामा विधायक अनंत सिंह पर JDU ने बड़ा एक्शन लिया है। पार्टी ने सिर्फ अनंत सिंह को पत्नी समेत बाहर नहीं निकाला, बल्कि उनकी विधायकी छीनने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
स्पीकर को अनुशंसा - 10वीं अनुसूची में सदस्यता रद्द करो
JDU प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के आदेश में लिखा है -
"JDU बिहार विधानसभा के माननीय अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत विधानसभा सदस्य के रूप में उनकी सदस्यता अविलंब रद्द करने हेतु अनुशंसा करती है।"
पार्टी का आरोप - अनंत सिंह ने पटना स्नातक विधान परिषद चुनाव में अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ काम किया और जन सुराज के अनुज सिंह का प्रचार किया, साथ ही पार्टी निर्देशों की अवहेलना और वरिष्ठ नेताओं पर आपत्तिजनक बयान दिए।
क्या जाएगी अनंत सिंह की विधायकी? क्या है 10वीं अनुसूची?
दसवीं अनुसूची को 1985 में 52वें संविधान संशोधन के जरिए जोड़ा गया था। इसे ही दल-बदल विरोधी कानून कहते हैं।
इसके तहत 2 स्थितियों में विधायकी जा सकती है:
1. स्वेच्छा से पार्टी छोड़ना: लिखित इस्तीफा जरूरी नहीं, आचरण से भी तय हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने रवि एस नाइक बनाम भारत संघ में यही कहा था।
2. व्हिप के खिलाफ जाना: सदन में पार्टी के व्हिप के खिलाफ वोट करे या बिना अनुमति अनुपस्थित रहे।
यहीं है कानूनी पेच
जानकारों के मुताबिक पार्टी से निष्कासन और विधायकी जाना दो अलग चीजें हैं। संविधान की नजर में पार्टी अनुशासन और कानूनी प्रावधान अलग रास्ते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 1996 में जी विश्वनाथन बनाम तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष मामले में स्पष्ट किया था कि किसी विधायक को पार्टी से निष्कासित कर देने भर से दल-बदल कानून के तहत उसकी स्थिति समाप्त नहीं हो जाती। जब तक विधायक खुद इस्तीफा न दे या दूसरी पार्टी में शामिल न हो, सदस्यता स्वतः नहीं जाती।
दूसरी बात - अनंत सिंह का मामला एमएलसी चुनाव में दूसरे दल के प्रचार का है, विधानसभा में व्हिप के खिलाफ वोटिंग का नहीं। इसलिए सिर्फ प्रचार के आरोप पर 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता साबित करना आसान नहीं होगा। विधान परिषद चुनाव में किसी का समर्थन करना विधानसभा सदस्यता समाप्त होने का आधार नहीं है।
अब क्या होगा? प्रक्रिया क्या है?
- सदस्यता रद्द करने का फैसला विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को करना होगा
- पहले JDU को सबूत पेश करने होंगे
- फिर अनंत सिंह को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा
- उसके बाद तथ्यों और कानून के आधार पर स्पीकर फैसला लेंगे
- इस फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है
फिलहाल अनंत सिंह की सदस्यता रद्द होने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है, विधायकी बनी हुई है। अब सब स्पीकर के फैसले पर निर्भर है कि 10वीं अनुसूची लागू होती है या नहीं।
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