बिहार के 6 हजार ईंट भट्ठा कारोबारियों को बड़ी राहत - सरकार ने ब्याज माफ किया, OTS में सिर्फ मूल राशि जमा करनी होगी, 289 करोड़ राजस्व का लक्ष्य
वर्षों से बकाया और ब्याज के बोझ से परेशान ईंट भट्ठा कारोबारियों को बिहार सरकार ने बड़ी राहत दी है। वन टाइम सेटलमेंट OTS के तहत करीब 6000 संचालकों को सिर्फ मूल बकाया राशि एकमुश्त जमा करनी होगी, ब्याज माफ होगा, इससे विभाग को 289.38 करोड़ राजस्व मिलेगा। खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में बताया कई दौर की बैठक और मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद कैबिनेट ने OTS को मंजूरी दी, अवधि 21 सितंबर से 20 दिसंबर तक है, अवधि में भुगतान न करने पर पुरानी व्यवस्था के तहत ब्याज सहित जमा करना होगा। सरकार का मकसद लंबित राजस्व वसूली और कारोबारियों को राहत देना है। ईंट निर्माता संघ ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिग-जैग तकनीक अपनाई है, अवैध भट्ठों पर कार्रवाई होगी। मंत्री ने बताया DMF राशि का अनुपात बदला, अब 70% राशि खनन वाले प्रखंड में और 30% अन्य प्रखंडों में खर्च होगी पहले 60:40 था, सांसद, विधायक, विधान पार्षदों को DMF सदस्य बनाया गया है। नवादा और शेखपुरा में पत्थर खनन ब्लॉक की नीलामी हो चुकी है, 22 सितंबर को GSI के साथ बैठक प्रस्तावित है।
पटना - बिहार के ईंट भट्ठा कारोबारियों के लिए राहत की बड़ी खबर है।
राज्य सरकार ने वर्षों से बकाया राशि और उस पर चढ़े ब्याज से परेशान करीब 6 हजार संचालकों के लिए वन टाइम सेटलमेंट OTS योजना को मंजूरी दे दी है।
खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में बताया कि OTS के तहत कारोबारियों को सिर्फ मूल बकाया राशि एकमुश्त जमा करनी होगी, पूरा ब्याज माफ कर दिया जाएगा। इससे सरकार को करीब 289 करोड़ 38 लाख रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है।
कब तक जमा करना होगा पैसा?
मंत्री ने बताया कारोबारियों के साथ कई दौर की बैठक हुई थी, उनकी लंबे समय से एकमुश्त भुगतान की मांग थी। मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाने के बाद कैबिनेट ने OTS प्रस्ताव को पास किया।
तय समय सीमा 21 सितंबर से 20 दिसंबर तक है। इस अवधि में भुगतान नहीं करने वालों को पुरानी व्यवस्था के तहत ब्याज सहित पूरी राशि देनी होगी।
प्रदूषण नियंत्रण और अन्य फैसले
ईंट निर्माता संघ से जुड़े कारोबारियों ने प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए जिग-जैग तकनीक अपनाई है, अवैध भट्ठों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
जिला खनिज फाउंडेशन DMF की राशि के इस्तेमाल का अनुपात बदला गया है। अब 70% राशि उसी प्रखंड में खर्च होगी जहां खनन हो रहा है और 30% जिले के अन्य प्रखंडों में, पहले यह 60:40 था।
पारदर्शिता के लिए सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों को DMF का सदस्य बनाया गया है।
पत्थर खनन को गति देने के लिए नवादा और शेखपुरा में ब्लॉकों की नीलामी हो चुकी है, अन्य जिलों में प्रक्रिया जारी है। 22 सितंबर को GSI के साथ बैठक प्रस्तावित है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
1
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)