नीरज कुमार vs अनंत सिंह विवाद की असली कहानी - 11 साल पुरानी अदावत, पुटुस हत्याकांड से AK-47 और पुदीना सिंह तक, 5 कारणों ने बढ़ाई खटास

JDU राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के हस्तक्षेप के बाद भी MLC नीरज कुमार और मोकामा विधायक अनंत सिंह का विवाद नहीं सुलझ रहा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का अनंत की पीठ पर हाथ रखना घी का काम कर गया। अदावत 11 साल पुरानी है, शुरुआत 24 जून 2015 पुटुस हत्याकांड में अनंत की गिरफ्तारी से हुई, चर्चा है माहौल बनाकर नवंबर 2015 में मोकामा से टिकट काटा गया, नीतीश ने नीरज को टिकट दिया, अनंत जेल से निर्दलीय लड़े और नीरज को 18348 वोट से हराया, प्रचार में नीरज ने अनंत को राजनीति का नासूर और आपराधिक गिरोह का सरगना कहा था। 5 कारणों ने खटास बढ़ाई - अगस्त 2019 में लदमा पैतृक आवास से AK-47, कारतूस, हैंड ग्रेनेड बरामदगी का आरोप नीरज पर लगाना, अनंत को पुदीना सिंह कहना जो दिल पर घाव कर गया, 2025 में जदयू में वापसी पर नीरज द्वारा नोटिस न लेना, 2025 विधानसभा में JDU से अनंत को टिकट मिलने पर नीरज का बयान कि आपराधिक चरित्र वाले के लिए प्रचार नहीं करूंगा जबकि अनंत ने लोकसभा में ललन सिंह का समर्थन किया था। मोकामा में वर्चस्व की लड़ाई का वीभत्स रूप है।

Sep 18, 2026 - 18:03
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 नीरज कुमार vs अनंत सिंह विवाद की असली कहानी - 11 साल पुरानी अदावत, पुटुस हत्याकांड से AK-47 और पुदीना सिंह तक, 5 कारणों ने बढ़ाई खटास

पटना - JDU में MLC नीरज कुमार और मोकामा विधायक अनंत सिंह के बीच चल रहा घमासान सिर्फ एक-दो बयानों का नहीं, बल्कि मोकामा में वर्चस्व की 11 साल पुरानी लड़ाई है। नीतीश कुमार के हस्तक्षेप के बाद भी मामला नहीं सुलझ रहा, ऊपर से केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का अनंत सिंह की पीठ पर हाथ रखना इस जंग में घी डालने जैसा हो गया है।

2015 से शुरू हुई पटकथा

इस अदावत की नींव 24 जून 2015 को पड़ी, जब बाढ़ के पुटुस हत्याकांड में अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई। चर्चा है कि इस गिरफ्तारी से उनके खिलाफ माहौल बनाया गया और नीतीश ने नवंबर 2015 विधानसभा चुनाव में मोकामा से अनंत का टिकट काटकर नीरज कुमार को दे दिया। अनंत जेल से निर्दलीय लड़े और नीरज को 18,348 वोटों से हरा दिया। प्रचार के दौरान नीरज ने कहा था - "अनंत सिंह राजनीति के नासूर और आपराधिक गिरोह के सरगना हैं, कानून उनके दरवाजे पर दस्तक दे चुका है, अब वे अंतिम दिन गिन रहे हैं।"

खटास के 5 बड़े कारण

1.  AK-47 कांड: अगस्त 2019 में अनंत के लदमा पैतृक आवास से AK-47, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद हुए। अनंत ने मान लिया कि इसके पीछे नीरज का हाथ है।

2.  पुदीना सिंह वाला तंज: नीरज ने अनंत को अपराधी कहने के साथ नया नाम 'पुदीना सिंह' दे दिया। सूत्रों के मुताबिक यह तंज अनंत के दिल पर गहरा घाव कर गया।

3.  जदयू में वापसी को इग्नोर: घूम-फिर कर अनंत फिर जदयू में आ गए, लेकिन नीरज ने उनकी वापसी का नोटिस तक नहीं लिया, स्वागत तो दूर।

4.  प्रचार से इनकार: 2025 में JDU ने मोकामा से अनंत को उतारा, जिसे ललन सिंह का प्रभाव माना गया। अनंत ने लोकसभा में ललन का भरपूर समर्थन किया था। लेकिन जब पत्रकारों ने नीरज से पूछा कि अनंत का प्रचार करेंगे? तो जवाब आया - "हम आपराधिक चरित्र वाले व्यक्ति के समर्थन में प्रचार नहीं करेंगे।"

दोनों एक ही जाति से आते हैं, फिर भी इन कारणों से छत्तीस का आंकड़ा बन गया है, जो अब पटना स्नातक MLC चुनाव में JDU के लिए सिरदर्द बन रहा है।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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