CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई में देरी, संस्थापक अभिजीत दिपके बोले - जानबूझकर रोका जा रहा, कोई कानूनी आधार नहीं

कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई रविवार देर शाम तक नहीं हो पाई। CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रशासन पर सुनवाई में देरी का आरोप लगाया। कहा - जेल में रखने के लिए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। 5 दिन की न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद भी रिहाई अटकी।

Oct 18, 2026 - 20:20
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CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई में देरी, संस्थापक अभिजीत दिपके बोले - जानबूझकर रोका जा रहा, कोई कानूनी आधार नहीं

नई दिल्ली। जंतर-मंतर प्रोटेस्ट केस में गिरफ्तार कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो सह-संयोजकों की रिहाई को लेकर नया बवाल खड़ा हो गया है। सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद भी रविवार देर शाम तक रिहा नहीं किया जा सका।

CJP का आरोप - जानबूझकर रोकी जा रही रिहाई

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, "दोनों की गिरफ्तारी को अवैध तरीके से जारी रखने के लिए सुनवाई में जानबूझकर देरी की जा रही है। उन्हें जेल में रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है, फिर भी हर हथकंडा अपनाया जा रहा है।"

संगठन की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि रिहाई की सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने मामले के गुण-दोष पर सुनवाई नहीं की।

सुबह 12 बजे की सुनवाई, SEM पहुंचे शाम 5 बजे

रत्ना सिंह के मुताबिक, "हमें बताया गया था कि सुनवाई दोपहर 12 बजे होगी। सारे दस्तावेज वेरिफाई हो चुके थे। हम सुबह से इंतजार कर रहे थे। SEM दोपहर 1:30 बजे पुलिस स्टेशन पहुंच गए थे, लेकिन कोर्ट रूम में शाम 5 बजे आए।"

उन्होंने आरोप लगाया कि सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट ने कहा कि उन्हें एक धमकी भरा मैसेज मिला है और पूरी चर्चा उसी पर होने लगी, रिहाई की फाइल पर कोई विचार ही नहीं हुआ।

रत्ना सिंह ने ये भी कहा कि अभियोजन पक्ष के सरकारी वकील जो पिछले 4 दिन से नहीं आ रहे थे, वो अचानक आज मौजूद थे, जो बताता है कि ये सब पहले से तय रणनीति थी।

क्या है पूरा मामला?

सौरव और आशुतोष को मंगलवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि वे बंद गेट को पार कर उस परिसर में घुसे थे जो प्रोटेस्ट के लिए नोटिफाइड नहीं था और वहां तिरंगा दिखाया था।

उनके साथ पकड़े गए बाकी लोगों को छोड़ दिया गया था, लेकिन इन दोनों को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। शनिवार को हिरासत खत्म होने के बाद भी रिहाई नहीं हुई।

CJP ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द रिहाई नहीं हुई तो वे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से सलाह लेकर कानूनी कार्रवाई करेंगे।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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