मन की बात में PM मोदी ने किया ई-संजीवनी का जिक्र - अंडमान से लद्दाख तक कैसे बनी वरदान, 1.90 लाख आरोग्य मंदिर से बदल रही सेहत
पीएम नरेंद्र मोदी ने मन की बात 139वें एपिसोड में टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी का जिक्र किया बताया कैसे दूर-दराज दुर्गम इलाकों में वरदान साबित हो रही है, अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के बच्चे, लक्षद्वीप कल्पेनी, लद्दाख जांस्कर और नागालैंड पेरेन के उदाहरण दिए, 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर वेलनेस सेंटर बने।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी का जिक्र किया और बताया कैसे ये दूर-दराज इलाकों के लिए वरदान बनी है।
PM ने बताए 4 उदाहरण - अंडमान से लद्दाख तक
1. अंडमान-निकोबार - बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के 7 साल के बच्चे ओहो-ताहाने को तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी थी। लोकल हेल्थ वर्कर्स ने ई-संजीवनी से एक्सपर्ट डॉक्टर से संपर्क किया। निमोनिया निकला और एक्सपर्ट निगरानी में तेजी से सुधार हुआ।
2. लक्षद्वीप - कल्पेनी में 60 साल के कुन्ही कोया जी की तबीयत अचानक बिगड़ी। समुद्र के पार कवरत्ती में बैठे डॉक्टर से ई-संजीवनी से संपर्क किया, लोकल टीम को गाइड किया और राहत पहुंचाई।
3. लद्दाख - जांस्कर की कुंजांग डोलमा जी को गर्भावस्था में कॉम्प्लिकेशंस हुए, ई-संजीवनी से स्पेशलिस्ट ने तुरंत मदद की।
4. नागालैंड - पेरेन में 12 साल की मिशेम के कान में संक्रमण और बुखार था, एक्सपर्ट ने बीमारी पकड़कर सही दवा बताई।
1.90 लाख आरोग्य मंदिर बने वेलनेस सेंटर
PM मोदी ने कहा - "एक समय डॉक्टर को दिखाने और छोटी जांच में काफी समय लगता था, बहुत कठिनाई होती थी। आज देश में लगभग 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर नई सुविधा लाए हैं। ये पंचायतों के वेलनेस सेंटर बन रहे हैं। सबसे सुखद गांव के लोग नियमित जांच करा रहे हैं ताकि स्वस्थ रहें और इसमें ई-संजीवनी बड़ी भूमिका निभा रही है।"
क्या है ई-संजीवनी?
स्वास्थ्य मंत्रालय की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है। इसके जरिए नागरिक घर बैठे स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप से ऑनलाइन डॉक्टर और एक्सपर्ट से सलाह ले सकते हैं। फोकस - डॉक्टर और मरीज के बीच दूरी खत्म करना।
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