'आतंकवाद को स्टेट पॉलिसी बनाना अस्वीकार्य' - जयशंकर का दुनिया को कड़ा संदेश, बोले जीरो टॉलरेंस जरूरी, रुबियो के पाकिस्तान प्रेम पर बिना नाम लिए वार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद पर दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कहा आतंकवाद को राज्य की नीति के तौर पर इस्तेमाल करना अस्वीकार्य कोई तर्क नहीं, जीरो टॉलरेंस जरूरी, यह बयान US विदेश मंत्री मार्को रुबियो के पाकिस्तान के साथ संबंधों के बचाव के बाद आया जहां रुबियो ने कहा था बातचीत से इस्लामाबाद के फैसलों पर प्रभाव बढ़ेगा।
नई दिल्ली। आतंकवाद पर भारत ने फिर दुनिया को कड़ा संदेश दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा - आतंकवाद को राज्य की नीति के तौर पर इस्तेमाल करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है और इसे सही ठहराने के लिए कोई तर्क नहीं दिया जा सकता।
दिल्ली में रविवार को कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा आतंकवाद वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा है। ये आज भी इसलिए जारी है क्योंकि दुनिया के सभी देश जीरो टॉलरेंस नहीं अपनाते। इतिहास से सबक मिलने के बावजूद कुछ देश सख्त रुख के बजाय 'राजनीतिक हिसाब-किताब' को प्राथमिकता देते हैं।
"शांति को अलग-अलग हिस्सों में नहीं बांटा जा सकता। कहीं भी होने वाला युद्ध हर जगह की शांति के लिए खतरा है। बातचीत और कूटनीति ही रास्ता है।"
रुबियो के बयान के बाद आया जयशंकर का वार
जयशंकर का बयान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान के कुछ दिन बाद आया है। रुबियो ने भारत यात्रा के दौरान पाकिस्तान के साथ संबंधों का बचाव करते हुए कहा था - इस्लामाबाद के साथ बातचीत और जुड़ाव से उसके फैसलों पर वाशिंगटन का प्रभाव बढ़ सकता है। आतंकवाद से ज्यादा काम अमेरिका से कोई नहीं करता।
रुबियो ने इंडिया टुडे इंटरव्यू में कहा था - "पाकिस्तान से रिश्ते भारत की कीमत पर नहीं हैं। भारत और अमेरिका आतंकवाद पर साझा चिंताएं रखते हैं।"
जयशंकर ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा - कुछ देश राजनीतिक हितों को सुरक्षा और शांति पर हावी होने देते हैं। आतंकवाद को किसी राजनीतिक उद्देश्य, रणनीतिक हित का हवाला देकर उचित नहीं ठहराया जा सकता। सिर्फ बयान नहीं, कार्रवाई में भी समान दृढ़ता चाहिए। जब तक वास्तविक जीरो टॉलरेंस नहीं, शांति के सामने चुनौती बनी रहेगी।
उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया संघर्षों का जिक्र करते हुए सामूहिक कार्रवाई की अपील की।
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