ट्रंप सरकार की रिपोर्ट में भारत का नाम: 'शैडो नेटवर्क' से चीन को टैरिफ से बचाने का आरोप, एक्सपोर्ट पर असर संभव

व्हाइट हाउस की नई रिपोर्ट में भारत समेत 40 देशों पर आरोप। कहा गया कि चीन अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए भारत जैसे देशों के जरिए 'शैडो ट्रांसशिपमेंट' कर रहा है। रिपोर्ट में भारत पर सीधा आरोप नहीं, लेकिन भारतीय एक्सपोर्ट की जांच बढ़ सकती है।

Aug 17, 2026 - 09:18
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ट्रंप सरकार की रिपोर्ट में भारत का नाम: 'शैडो नेटवर्क' से चीन को टैरिफ से बचाने का आरोप, एक्सपोर्ट पर असर संभव

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: ट्रंप प्रशासन ने एक नई रिपोर्ट में भारत समेत 40 देशों पर गंभीर आरोप लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक ये देश चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचने में मदद कर रहे हैं।

क्या है 'ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम'?  
व्हाइट हाउस के 'ऑफिस ऑफ ट्रेड एंड मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी' ने 25 पेज की रिपोर्ट "The Great Transshipment Scam: Rise, Scope, and Costs" जारी की है। इसे पीटर नवारो की टीम ने तैयार किया है।

रिपोर्ट कहती है कि 2018 में सेक्शन 301 टैरिफ के बाद चीन ने सीधा एक्सपोर्ट घटा दिया। अब चीनी कंपनियां सामान को भारत, वियतनाम, मैक्सिको, थाईलैंड जैसे देशों में भेजती हैं। वहां रीपैकेजिंग, लेबल बदलना या मामूली प्रोसेसिंग कर उसे उस देश का उत्पाद बताकर अमेरिका भेज दिया जाता है। इसे "शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क" कहा गया है।

रिपोर्ट का अनुमान है कि 2025 में लगभग 67 अरब डॉलर का चीनी सामान इसी तरीके से अमेरिका पहुंच सकता है।

भारत का नाम क्यों आया?  
रिपोर्ट में 'मेक इन इंडिया' और PLI स्कीम का जिक्र है। कहा गया कि भारत मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है, और कुछ चीनी प्रोडक्ट्स सीमित प्रोसेसिंग के बाद यहीं से अमेरिका जा सकते हैं।  
हालांकि रिपोर्ट में किसी भारतीय कंपनी या शिपमेंट का नाम नहीं है और न ही भारत पर सीधे गलत काम का आरोप है।

भारत पर क्या असर पड़ेगा?  
एक्सपर्ट्स का कहना है कि असर जांच बढ़ने पर होगा:
1. US कस्टम 'Rules of Origin' की जांच सख्त कर सकता है
2. इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर, स्टील, मशीनरी जैसे सेक्टर में ज्यादा दस्तावेज मांग सकते हैं
3. एक्सपोर्टर्स को साबित करना होगा कि उत्पाद का अधिकांश निर्माण भारत में हुआ

GTRI का तर्क है कि प्रोडक्ट में चीनी पार्ट्स होने से वो ऑटोमैटिक चीनी एक्सपोर्ट नहीं हो जाता। आज की सप्लाई चेन ग्लोबल है।

भारत को क्या करना चाहिए?  
ट्रेड एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि भारत को Origin सर्टिफिकेट, कस्टम वेरिफिकेशन और डॉक्यूमेंटेशन को और मजबूत करना चाहिए। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और भारतीय एक्सपोर्ट की साख बचेगी।

क्या रिश्तों पर असर होगा?  
फिलहाल भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बात चल रही है। जानकार मानते हैं कि इस रिपोर्ट से जांच बढ़ेगी लेकिन साझेदारी पटरी से नहीं उतरेगी। अमेरिका के लिए भारत अभी भी चीन विकल्प के तौर पर अहम है।

रिपोर्ट में भारत का नाम आने से US मार्केट में भारतीय माल की स्क्रूटनी बढ़ सकती है। सरकार के लिए अब सप्लाई चेन को पारदर्शी रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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