ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिकों की मौत: 'डोवर टेस्ट' बना ट्रंप के लिए सबसे बड़ी चुनौती
ईरान के साथ जारी टकराव में अब तक 17 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं। हर ताबूत के डोवर एयरफोर्स बेस पहुंचने पर अमेरिका में युद्ध को लेकर गुस्सा बढ़ रहा है। प्यू रिसर्च के सर्वे में 61% लोग इस कार्रवाई के खिलाफ हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ताबूतों की तस्वीरें जनमत बदल सकती हैं और ट्रंप के लिए राजनीतिक बोझ बन सकती हैं।
ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिकी सैनिकों की मौत ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। फरवरी से अब तक 17 अमेरिकी जवान मारे जा चुके हैं और हर ताबूत के अमेरिका लौटने के साथ ही देश के अंदर युद्ध को लेकर सवाल तेज हो रहे हैं।
क्या है 'डोवर टेस्ट'?
जब भी किसी मोर्चे पर अमेरिकी सैनिक शहीद होते हैं, उनके पार्थिव शरीर सबसे पहले डेलावेयर के डोवर एयरफोर्स बेस पर लाए जाते हैं। जब इन ताबूतों की तस्वीरें और वीडियो जनता तक पहुंचते हैं, तो लोगों के सामने युद्ध की असली कीमत सामने आ जाती है।
जनता के मन में एक ही सवाल उठता है - "क्या ये जंग जरूरी थी?" इसी जनभावना को अनौपचारिक तौर पर 'डोवर टेस्ट' कहा जाता है। अगर लोग युद्ध के साथ खड़े रहते हैं तो सरकार पास, वरना ये युद्ध सरकार के लिए बोझ बन जाता है।
इतिहास गवाह है
वियतनाम युद्ध में लगभग 58 हजार अमेरिकी सैनिकों की मौत और ताबूतों की तस्वीरों ने जनमत पूरी तरह बदल दिया था। बड़े विरोध के बाद 1973 में अमेरिका को सेना वापस बुलानी पड़ी थी। इसी वजह से 1991 से 2009 तक सरकार ने डोवर आने वाले ताबूतों की मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी थी। ओबामा सरकार ने बाद में ये प्रतिबंध हटाया था।
ट्रंप के लिए क्यों मुसीबत?
अब तक 17 सैनिकों की मौत और कई घायलों के बाद ट्रंप को खुद डोवर बेस जाकर श्रद्धांजलि देनी पड़ी। लेकिन हर नए ताबूत के साथ जनता पूछ रही है कि इस युद्ध का मकसद क्या है और अमेरिका को इससे क्या हासिल होगा।
प्यू रिसर्च का सर्वे ट्रंप के लिए झटका है। रिपोर्ट के मुताबिक 61% अमेरिकी ईरान पर सैन्य कार्रवाई के खिलाफ हैं, जबकि सिर्फ 37% समर्थन में हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं। ईरान अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है और अमेरिका जवाबी हमले कर रहा है। ऐसे में बिना किसी निकास के ये जंग 'ऑल आउट वॉर' की तरफ बढ़ती दिख रही है।
अब हर ताबूत के साथ ट्रंप सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। सवाल यही है कि क्या ये जंग जनता के समर्थन से पास हो पाएगी या 'डोवर टेस्ट' में फेल हो जाएगी।
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