1.8 करोड़ में बनी 'हनुमान अंश' ने बड़े बजट फिल्मों को पछाड़ा, 25 थिएटर में भी हाउसफुल, डायरेक्टर ने गिनना बंद किया कलेक्शन

1.8 करोड़ के बजट में बनी छोटी फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर सरप्राइज हिट, 7 अगस्त को रिलीज के बाद 250 से घटकर 25 थिएटर रह गए फिर भी कमाई बरकरार। डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी बोले- अब कलेक्शन गिनना बंद कर दिया, प्रेमानंद महाराज और हनुमान जी के आशीर्वाद से चल रही है फिल्म। आवारापन 2 और टॉक्सिक के बीच भी 2600-2800 शोज हाउसफुल, गुजरात-राजस्थान धार्मिक यात्रा के बाद पकड़ी रफ्तार। वर्ड ऑफ माउथ से मिली सफलता।

Aug 31, 2026 - 16:57
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1.8 करोड़ में बनी 'हनुमान अंश' ने बड़े बजट फिल्मों को पछाड़ा, 25 थिएटर में भी हाउसफुल, डायरेक्टर ने गिनना बंद किया कलेक्शन

मुंबई: बड़ी रिलीज के बीच एक छोटे बजट की फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सबको चौंका दिया है। 1.8 करोड़ रुपये में बनी 'हनुमान अंश' को लेकर डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी का दावा चर्चा में है।

फिल्म 7 अगस्त को रिलीज हुई थी। शुरुआत में सीमित स्क्रीन मिलीं, फिर बड़ी फिल्मों के दबाव में स्क्रीन 250 से घटकर सिर्फ 25 थिएटर रह गईं, लेकिन कलेक्शन नहीं रुका।

डायरेक्टर ने कलेक्शन गिनना बंद किया

ANI से बातचीत में विशाल ने कहा – “अब मैंने बॉक्स ऑफिस गिनना बंद कर दिया है। अब देखना है कि दर्शकों का प्यार और प्रेमानंद महाराज जी का आशीर्वाद फिल्म को कहां तक ले जाता है।” उनके लिए आंकड़ों से ज्यादा जरूरी फिल्म का दर्शकों तक पहुंचना है।

25 थिएटर में भी हाउसफुल

डायरेक्टर के मुताबिक सबसे दिलचस्प बात – जब सिर्फ 25 थिएटर बचे थे, तब भी फिल्म उतना ही कलेक्शन कर रही थी जितना 250 थिएटर पर कर रही थी। वजह – बचे हुए शोज हाउसफुल चल रहे थे। बड़ी फिल्म आने से थिएटर मालिकों को उसके शोज बढ़ाने पड़े, पर ‘हनुमान अंश’ के शोज में भीड़ बनी रही।

धार्मिक यात्रा के बाद बदली किस्मत

विशाल ने सफलता को आध्यात्मिक यात्रा से जोड़ा। फिल्म की टीम गुजरात में प्रेमानंद महाराज जी से जुड़े स्थान और फिर राजस्थान में सालासर बालाजी, हनुमान मंदिर और श्रीनाथ जी के दर्शन करने गई। डायरेक्टर मानते हैं – उसी के बाद फिल्म ने रफ्तार पकड़ी। यह उनके लिए सिर्फ बॉक्स ऑफिस नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।

अब 2600-2800 शोज

1.8 करोड़ में बनी फिल्म अब 2600 से 2800 शोज में चल रही है और शोज बढ़ रहे हैं। ‘आवारापन 2’ और ‘टॉक्सिक’ जैसी बड़ी फिल्मों के बीच भी इसे दर्शकों का प्यार मिल रहा है। वर्ड ऑफ माउथ ही इसकी असली ताकत बना।

जल्दबाजी में फ्लॉप कहना गलत

विशाल ने कहा – इंडस्ट्री में किसी फिल्म को तुरंत फ्लॉप घोषित करना गलत है। जब तक फिल्म थिएटर में है और दर्शक आ रहे हैं, तब तक अंतिम फैसला नहीं सुनाना चाहिए।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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