NDA में मतभेद की राजनीति - UCC से फरक्का संधि तक JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा क्यों खड़े कर रहे हैं नए मुद्दे?
NDA में इन दिनों मतभेद दिखाकर अलग दिखने की कवायद चल रही है। छोटे ही नहीं बड़े दल भी इसमें हैं। JDU के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा एंड टीम नए-नए मुद्दों पर मतभेद खड़ा कर रही है। पहले UCC पर श्याम रजक ने कहा था JDU ने संसद में बिल का समर्थन किया था लेकिन बिहार में लागू नहीं होगा, NDA मिली-जुली सरकार है। फिर फरक्का जल संधि पर संजय झा ने कहा भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि का नवीनीकरण किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं, इससे बिहार को पानी नहीं मिला और सिल्ट से बाढ़ बढ़ी। सियासी चर्चा है कि मंत्रिपरिषद विस्तार की आहट पर संजय झा दबाव की राजनीति कर रहे हैं। JDU कोटे में दो मंत्री हैं ललन सिंह और रामनाथ ठाकुर, फॉर्मूला संजय इन ललन आउट हो सकता है।
NDA की सियासत में इन दिनों मतभेद के जरिए अलग दिखने का ट्रेंड तेज हो गया है। इसमें छोटे दल ही नहीं, बड़े दल भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा चर्चा में JDU के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा की टीम है जो मतभेद का नया-नया ग्राउंड तैयार कर रही है।
1. UCC पर बिहार में नो - श्याम रजक
गृह मंत्री अमित शाह के 2029 तक सभी राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान के बाद JDU में हलचल मची। पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा पार्टी ने संसद में UCC बिल का समर्थन किया था लेकिन साफ कहा था बिहार में लागू नहीं करेंगे। आज भी उसी रुख पर हैं। उन्होंने कहा बिहार में अकेली भाजपा की नहीं NDA की सरकार है, इसलिए एक दल के फैसले से UCC लागू नहीं होगा।
2. फरक्का संधि पर बवाल
भारत-बांग्लादेश फरक्का जल संधि 12 दिसंबर 1996 को 30 साल के लिए हुई थी, जो इस दिसंबर में खत्म हो रही है। उससे पहले ही संजय झा ने कह दिया सरकार रहे या जाए, इस संधि का नवीनीकरण स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया 1996 में केंद्र और बिहार नेतृत्व ने राज्य हितों की बलि दी, तीन दशक से बिहार को पर्याप्त पानी नहीं मिला। फरक्का बैराज से गंगा में सिल्ट जमा हो रहा है, नदी का तल ऊंचा हो रहा है और बिहार में हर साल बाढ़ गंभीर हो रही है।
निगाहें कहीं निशाना कहीं?
राजनीतिक गलियारे में चर्चा है संजय झा मौके पर चौका मारने में माहिर हैं। जैसे ही मंत्रिपरिषद विस्तार की सूचना मिली उन्होंने दबाव की राजनीति शुरू कर दी। इससे पहले वे भाजपा आलाकमान से मिलकर कनेक्शन जोड़ चुके हैं। कोटे के हिसाब से JDU को दो मंत्री पद हैं - ललन सिंह और रामनाथ ठाकुर। अति पिछड़ा होने से रामनाथ ठाकुर सेफ हैं। नया फॉर्मूला संजय इन और ललन आउट हो सकता है। अगर भाजपा बड़ा दिल दिखाकर तीन पद देती है तो तीनों बने रह सकते हैं।
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