बांकीपुर में 10 हजार की नौकरी के बाद अब शिक्षकों पर PK का दांव, बोले - इस बार वोट बच्चों के भविष्य और 7वें वेतनमान पर होगा
जनसुराज संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर मॉडल के बाद अब शिक्षकों का मुद्दा उठा लिया। वैशाली में शिक्षकों की बैठक में कहा - इस बार लोग न ऊपर देखकर न नीचे, अपने बच्चों के भविष्य, रोजगार और शिक्षकों की समस्या देखकर वोट करेंगे। जनसुराज ने संकल्प लिया है लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों को 7वां वेतनमान दिलाएंगे। दशकों से वित्त रहित शिक्षकों की समस्या का समाधान होगा। तिरहुत से जनसुराज स्नातक उम्मीदवार इंजीनियर मोहन जीते तो 10 हजार बेरोजगार युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाएंगे। बांकीपुर जैसी सुविधा तिरहुत के स्नातकों को भी मिलेगी। जीतन राम मांझी के 'तिलचट्टा' वाले बयान पर बोले - उनके शब्दों को कोई गंभीरता से नहीं लेता।
वैशाली। जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में बेरोजगार युवाओं को 10 हजार की नौकरी का वादा करने के बाद अब शिक्षकों के लिए 7वें वेतनमान का एजेंडा पकड़ लिया है।
वैशाली में शिक्षकों की एक बैठक में PK ने कहा कि इस बार बिहार में वोट किसी को जिताने-हराने के लिए नहीं, बल्कि बनी हुई सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए होगा।
"शिक्षकों को 7वां वेतनमान दिलाएंगे"
प्रशांत किशोर ने कहा,
"वैशाली के शिक्षक इस बात पर जुटे हैं कि 7वां वेतनमान कैसे सुनिश्चित हो। इस बार का वोट इस बात के लिए है कि यहां के शिक्षकों को 7वां वेतनमान मिले, दशकों से चली आ रही वित्त रहित शिक्षकों की समस्या खत्म हो और पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिले।"
उन्होंने ऐलान किया कि जनसुराज ने लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों को 7वां वेतनमान दिलाने का संकल्प लिया है।
तिरहुत में 10 हजार नौकरी का वादा
जनसुराज के तिरहुत स्नातक उम्मीदवार इंजीनियर मोहन का जिक्र करते हुए PK ने कहा कि अगर वो जीतते हैं तो तिरहुत क्षेत्र के कम से कम 10 हजार पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने की जिम्मेदारी जनसुराज की होगी।
बोले - "बांकीपुर में जिस तरह की सुविधा लोगों को दी जा रही है, वैसी ही सुविधा तिरहुत के स्नातकों को भी मिलनी चाहिए।"
मांझी पर तंज, सरकार पर हमला
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को 'तिलचट्टा' कहे जाने पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर निशाना साधते हुए PK ने कहा कि उनके शब्दों के चयन और वक्तव्यों को लोग गंभीरता से नहीं लेते।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, पेपर लीक, बेरोजगारी और चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों में गुस्सा है, वही सड़कों पर दिख रहा है। सरकार सेना-पुलिस लगाकर कुछ दिन लोगों को घर में रोक सकती है, आंदोलन खत्म नहीं कर सकती। बड़ी संख्या में फोर्स की तैनाती ही आंदोलन की ताकत और सरकार की चिंता दिखाती है। जब तक शिक्षा, रोजगार और चुनाव सुधार पर ठोस कदम नहीं उठेंगे, आंदोलन जारी रहेंगे।
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