NDA में फूट! उपेंद्र कुशवाहा के आदेश को RLM विधायकों ने दिखाया ठेंगा, JDU के खिलाफ उतरे प्रत्याशी के नामांकन में पहुंचे

बिहार विधान परिषद चुनाव के बीच NDA में घमासान! RLM चीफ उपेंद्र कुशवाहा ने कहा था - BJP-JDU उम्मीदवारों के साथ रहो, अलग एक्टिविटी अनुशासनहीनता होगी। इसके बाद भी RLM के तीनों विधायक आलोक सिंह, रामेश्वर महतो और माधव आनंद सारण शिक्षक सीट से JDU के पुष्कर आनंद के खिलाफ चुनाव लड़ रहे रामपुकार सिन्हा कुशवाहा के नामांकन में पहुंच गए।

Oct 05, 2026 - 18:41
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NDA में फूट! उपेंद्र कुशवाहा के आदेश को RLM विधायकों ने दिखाया ठेंगा, JDU के खिलाफ उतरे प्रत्याशी के नामांकन में पहुंचे

पटना। बिहार में विधान परिषद चुनाव से पहले NDA में सबकुछ ठीक नहीं है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में खुली बगावत के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के सख्त आदेश के बावजूद पार्टी के तीनों विधायक सारण शिक्षक सीट पर JDU के खिलाफ चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार के समर्थन में उतर गए हैं।

दरअसल, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से NDA ने JDU के पुष्कर आनंद को उम्मीदवार बनाया है। वहीं RLM के सीनियर नेता रामपुकार सिन्हा कुशवाहा भी इसी सीट से मैदान में हैं। अब RLM के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह, बाजपट्टी विधायक रामेश्वर महतो और मधुबनी विधायक माधव आनंद रामपुकार के नामांकन में शामिल होने पहुंच गए।

उपेंद्र कुशवाहा ने 3 दिन पहले दी थी चेतावनी

इस बगावत को इसलिए बड़ा माना जा रहा है क्योंकि 3 दिन पहले ही उपेंद्र कुशवाहा ने X पर क्लियर कर दिया था कि बिहार में MLC चुनाव में सिर्फ BJP और JDU के उम्मीदवार NDA के उम्मीदवार हैं और RLM पूरी मजबूती से उनके साथ है। उन्होंने साफ कहा था कि इसके अलावा पार्टी के किसी साथी की कोई भी चुनावी गतिविधि अनुशासनहीनता मानी जाएगी।

इसके बावजूद तीनों विधायकों का JDU के खिलाफ जाना सीधा उपेंद्र कुशवाहा की लाइन के खिलाफ है।

आलोक सिंह बोले - कार्यकर्ता का सम्मान ही संगठन का सम्मान

प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह ने फेसबुक पोस्ट कर सफाई भी दी है। उन्होंने लिखा - "राजनीति केवल चुनाव लड़ने और जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान, निष्ठा और संगठन के रिश्तों का नाम है।"

उन्होंने कहा कि RLM NDA का विश्वसनीय सहयोगी था, है और रहेगा। PM मोदी और CM सम्राट चौधरी के नेतृत्व में उनका समर्थन जारी रहेगा और शीर्ष नेतृत्व का फैसला सर्वोपरि है। लेकिन साथ ही उन्होंने कार्यकर्ता के सम्मान की बात कहकर रामपुकार सिन्हा के साथ खड़े होने का ऐलान कर दिया।

अब सवाल यही है कि प्रदेश अध्यक्ष खुद बगावत की अगुवाई कर रहे हैं तो क्या उपेंद्र कुशवाहा एक्शन लेंगे? क्या RLM में टूट तय है? नजरें अब कुशवाहा के अगले कदम पर टिकी हैं।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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