रूस में प्लेग से लैब वर्कर की मौत पर हड़कंप, क्रेमलिन बोला- फर्जी खबर, WHO ने मांगी पूरी जानकारी

रूस के साइबेरिया में इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 साल की लैब टेक्नीशियन दर्या शिपिलोवा की 2 अक्टूबर को मौत के बाद हड़कंप मचा है। लोकल मीडिया का दावा- टेस्ट ट्यूब टूटने से प्लेग बैक्टीरिया से संक्रमित हुईं। रूस की एजेंसी TASS ने अज्ञात निमोनिया बताया, क्रेमलिन ने दूसरे केस को फर्जी कहा। WHO चीफ टेड्रोस बोले- पूरी तस्वीर नहीं है, रिस्क असेसमेंट नहीं कर पा रहे, लेकिन रूस में रिस्क कम और यूरोप में बहुत कम है। 200 लोग ऑब्जर्वेशन में, 5000 टेस्ट निगेटिव।

Oct 08, 2026 - 18:12
0 2
रूस में प्लेग से लैब वर्कर की मौत पर हड़कंप, क्रेमलिन बोला- फर्जी खबर, WHO ने मांगी पूरी जानकारी

मॉस्को। रूस के साइबेरिया में प्लेग रिसर्च लैब में काम करने वाली 28 साल की वर्कर की मौत के बाद सनसनी फैल गई है। मामला इरकुत्स्क के 'एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ साइबेरिया एंड द फार ईस्ट' का है, जो 1934 से प्लेग, हैजा, एंथ्रेक्स जैसी खतरनाक बीमारियों पर रिसर्च करता है।

मृतक की पहचान लैब टेक्नीशियन दर्या शिपिलोवा के तौर पर हुई है, जिनकी 2 अक्टूबर 2026 को मौत हुई। रूसी एजेंसी TASS ने कारण 'अज्ञात निमोनिया' बताया, लेकिन लोकल मीडिया का दावा है कि उन्होंने डॉक्टरों को बताया था कि लैब में प्लेग बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूट गई थी।

घटना के बाद शेलेखोव अस्पताल को क्वारंटीन कर 200 लोगों को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है, गवर्नर इगोर कोब्ज़ेव ने पब्लिक इवेंट रद्द कर दिए।

क्रेमलिन vs WHO

क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने दूसरे संदिग्ध केस की खबरों को 'फर्जी' बताया और कहा सिर्फ सरकारी बयानों पर भरोसा करें। रूस का दावा है कि मौत सामान्य वायरल संक्रमण से हुई, 5000 लैब टेस्ट में कोई पैथोजन नहीं मिला और महामारी का खतरा नहीं है।

वहीं WHO चीफ टेड्रोस ने कहा, "हमारे पास पूरी तस्वीर नहीं है, हम पूरा रिस्क असेसमेंट नहीं कर पा रहे।" WHO ने फिलहाल रूस में रिस्क 'कम' और यूरोप में 'बहुत कम' बताया है।

प्लेग कितना खतरनाक?

प्लेग 'यर्सिनिया पेस्टिस' बैक्टीरिया से होता है, न्यूमोनिक प्लेग सबसे खतरनाक है जो फेफड़ों पर अटैक करता है। इलाज एंटीबायोटिक्स (जेंटामाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन) से संभव है, शुरुआती इलाज पर रिकवरी बहुत ज्यादा है। हर साल मेडागास्कर, कांगो में सैकड़ों केस आते हैं।

रूसी एक्सपर्ट मिखाइल फावोरोव ने ही टेस्ट ट्यूब थ्योरी पर सवाल उठाया- "इंस्टीट्यूट में प्रोटेक्टिव सूट पहना जाता है, ट्यूब टूटने से संक्रमण की संभावना बहुत कम है।"

अमेरिका, EU और मंगोलिया ने बॉर्डर पर हेल्थ मॉनिटरिंग तेज कर दी है। ट्रंप ने कहा ये बायो-वेपन जैसा नहीं लगता, लेकिन पारदर्शिता जरूरी है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 1
Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

Comments (0)

User