शिक्षक संस्थानों से PAR मांगने का अधिकार NCTE को है, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा
शिक्षक दिवस पर NCTE को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि NCTE को शिक्षक शिक्षा संस्थानों से सालाना परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (PAR) मांगने का पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का फैसला पलट दिया, जिसने NCTE का नोटिस रद्द कर दिया था।
नई दिल्ली - शिक्षक दिवस के अवसर पर नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी जीत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि NCTE को देशभर के शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों से हर साल परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (PAR) मांगने का कानूनी अधिकार है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच के फैसले को पलटते हुए यह आदेश दिया।
क्या था मामला?
NCTE ने 22 सितंबर 2019 को एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी मान्यता प्राप्त टीचर एजुकेशन संस्थानों को ऑनलाइन पोर्टल पर सालाना PAR जमा करने को कहा था। इसके लिए सरकारी संस्थानों से 5,000 रुपये और प्राइवेट संस्थानों से 15,000 रुपये शुल्क तय किया गया था। नोटिस में कहा गया था कि रिपोर्ट नहीं देने पर NCTE एक्ट की धारा 17(1) के तहत कार्रवाई होगी।
कई संस्थानों ने इस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन डिवीजन बेंच ने NCTE का नोटिस यह कहते हुए रद्द कर दिया कि PAR का प्रोफॉर्मा NCTE ने खुद तैयार नहीं किया और धारा 12(k) के तहत यह काम सदस्य सचिव को नहीं सौंपा जा सकता।
NCTE ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NCTE एक्ट की धारा 12(k) काउंसिल को मान्यता प्राप्त संस्थानों की जवाबदेही तय करने के लिए प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली बनाने का अधिकार देती है। यदि किसी नियामक संस्था को यह अधिकार है तो सिर्फ तकनीकी आधार पर उसे रोकना सही नहीं है।
NCTE ने बताया ऐतिहासिक फैसला
NCTE चेयरमैन प्रो. पंकज अरोड़ा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह NCTE की रेगुलेटरी अथॉरिटी की पुष्टि करता है। उन्होंने बताया कि देश में करीब 16,000 टीचिंग संस्थान हैं और NEP 2020 के तहत क्वालिटी सुधार सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
NCTE के मुताबिक कई संस्थानों में सिर्फ रजिस्ट्रेशन होता है, न इंफ्रास्ट्रक्चर है न पढ़ाने वाले शिक्षक। डमी कैंडिडेट्स की शिकायतें भी मिली थीं, इसलिए PAR जरूरी थी। करीब 2500 संस्थानों ने बार-बार कहने के बाद भी रिपोर्ट जमा नहीं की थी। CAG खुद NCTE का ऑडिट करता है, इसलिए संस्थानों की क्वालिटी चेक करना जरूरी है।
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