शिक्षक संस्थानों से PAR मांगने का अधिकार NCTE को है, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा

शिक्षक दिवस पर NCTE को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि NCTE को शिक्षक शिक्षा संस्थानों से सालाना परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (PAR) मांगने का पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का फैसला पलट दिया, जिसने NCTE का नोटिस रद्द कर दिया था।

Sep 05, 2026 - 18:48
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शिक्षक संस्थानों से PAR मांगने का अधिकार NCTE को है, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा

नई दिल्ली - शिक्षक दिवस के अवसर पर नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी जीत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि NCTE को देशभर के शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों से हर साल परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (PAR) मांगने का कानूनी अधिकार है।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच के फैसले को पलटते हुए यह आदेश दिया।

क्या था मामला?

NCTE ने 22 सितंबर 2019 को एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी मान्यता प्राप्त टीचर एजुकेशन संस्थानों को ऑनलाइन पोर्टल पर सालाना PAR जमा करने को कहा था। इसके लिए सरकारी संस्थानों से 5,000 रुपये और प्राइवेट संस्थानों से 15,000 रुपये शुल्क तय किया गया था। नोटिस में कहा गया था कि रिपोर्ट नहीं देने पर NCTE एक्ट की धारा 17(1) के तहत कार्रवाई होगी।

कई संस्थानों ने इस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन डिवीजन बेंच ने NCTE का नोटिस यह कहते हुए रद्द कर दिया कि PAR का प्रोफॉर्मा NCTE ने खुद तैयार नहीं किया और धारा 12(k) के तहत यह काम सदस्य सचिव को नहीं सौंपा जा सकता।

NCTE ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NCTE एक्ट की धारा 12(k) काउंसिल को मान्यता प्राप्त संस्थानों की जवाबदेही तय करने के लिए प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली बनाने का अधिकार देती है। यदि किसी नियामक संस्था को यह अधिकार है तो सिर्फ तकनीकी आधार पर उसे रोकना सही नहीं है।

NCTE ने बताया ऐतिहासिक फैसला

NCTE चेयरमैन प्रो. पंकज अरोड़ा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह NCTE की रेगुलेटरी अथॉरिटी की पुष्टि करता है। उन्होंने बताया कि देश में करीब 16,000 टीचिंग संस्थान हैं और NEP 2020 के तहत क्वालिटी सुधार सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

NCTE के मुताबिक कई संस्थानों में सिर्फ रजिस्ट्रेशन होता है, न इंफ्रास्ट्रक्चर है न पढ़ाने वाले शिक्षक। डमी कैंडिडेट्स की शिकायतें भी मिली थीं, इसलिए PAR जरूरी थी। करीब 2500 संस्थानों ने बार-बार कहने के बाद भी रिपोर्ट जमा नहीं की थी। CAG खुद NCTE का ऑडिट करता है, इसलिए संस्थानों की क्वालिटी चेक करना जरूरी है।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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