वीडियो कॉल काफी नहीं..! कनाडा छोड़ बेंगलुरु लौटे टेक लीडर की पोस्ट वायरल...

बेंगलुरु के टेक लीडर रमेश एनएन ने कनाडा में Corcentric में डायरेक्टर की नौकरी छोड़ 6 साल पहले भारत वापसी का फैसला किया। कारण था बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहना। लिंक्डइन पोस्ट में बताया- वीडियो कॉल से आगे बढ़कर साथ रहना जरूरी था। उनका कहना है करियर पीछे नहीं गया, बेंगलुरु का स्टार्टअप माहौल और भी डायनेमिक मिला। पोस्ट वायरल, कई NRI ने सहमति जताई।

Jul 21, 2026 - 18:47
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वीडियो कॉल काफी नहीं..! कनाडा छोड़ बेंगलुरु लौटे टेक लीडर की पोस्ट वायरल...
वीडियो कॉल काफी नहीं..! कनाडा छोड़ बेंगलुरु लौटे टेक लीडर की पोस्ट वायरल...
वीडियो कॉल काफी नहीं..! कनाडा छोड़ बेंगलुरु लौटे टेक लीडर की पोस्ट वायरल...

विदेश में सेटल प्रोफेशनल्स के सामने अक्सर एक ही सवाल आता है - करियर या परिवार? बेंगलुरु के रमेश एनएन ने 6 साल पहले इसका जवाब देकर सबको चौंका दिया था।

कनाडा की नौकरी छोड़ भारत आए  
IT कंपनी Corcentric में डायरेक्टर ऑफ इंजीनियरिंग रहे रमेश ने कनाडा की आरामदायक जिंदगी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया। उन्होंने हाल ही में लिंक्डइन पर अपनी पूरी जर्नी शेयर की।

रमेश लिखते हैं, "ये फैसला आसान नहीं था। ये 'आराम और अपनापन' बनाम 'ग्लोबल एक्सपोजर और जिम्मेदारी' के बीच का चुनाव था।"  
उन्होंने महसूस किया कि परिवार के पलों को वीडियो कॉल तक सीमित नहीं रखा जा सकता। "शारीरिक रूप से माता-पिता के साथ रहना, रोजमर्रा में शामिल होना... ये अहसास आपका नजरिया पूरी तरह बदल देता है।"

करियर में नहीं आई रुकावट  
आम धारणा है कि विदेश से लौटने पर करियर पीछे चला जाता है। लेकिन रमेश के लिए उल्टा हुआ। परिवार के साथ बेंगलुरु शिफ्ट होने के बाद उन्हें लगा कि यहां का टैलेंट पूल, स्टार्टअप इकोसिस्टम और काम की रफ्तार कनाडा से भी ज्यादा डायनेमिक है।

हां, कुछ चुनौतियां थीं - इंफ्रास्ट्रक्चर में समझौता, लाइफस्टाइल बदलना, सिस्टम को फिर से समझना। पर रमेश कहते हैं, "माता-पिता के साथ होने का सुकून इन सब परेशानियों को छोटा कर देता है।"

पोस्ट का सबसे बड़ा संदेश  
रमेश ने अंत में लिखा:
"सफलता इस बात से तय नहीं होती कि आप दुनिया में कहां हैं। सफलता इस बात से तय होती है कि आप वहां हैं जहां आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है।"

सोशल मीडिया पर मिली सराहना  
उनकी पोस्ट पर कई NRI और लौटे हुए प्रोफेशनल्स ने कमेंट किए।  
एक यूजर ने लिखा - "मैं 2015 में अमेरिका से लौटा। पहला साल मुश्किल था, पर अब यहीं शांति मिली।"  
दूसरे ने कहा - "सफलता भूगोल से नहीं, रिश्तों से तय होती है।"  
तीसरे ने लिखा - "परिवार ही सब कुछ है। अच्छा किया जो वापस आए।"

रमेश की कहानी उन हजारों प्रोफेशनल्स के लिए मिसाल बन गई है जो 'घर' और 'करियर' के बीच फंसे हैं।

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