नीट पेपर लीक पर संसद में गूंजा अखिलेश का गुस्सा, कहा- "छात्रों की बात नहीं सुनी तो सड़क पर उतरेंगे"

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नीट पेपर लीक को लेकर संसद से लेकर सड़क तक सरकार को घेरा। राहुल गांधी के साथ PM आवास के पास धरने के बाद हिरासत और रिहाई हुई। लोकसभा में बोलने का मौका न मिलने पर अखिलेश भड़के और स्पीकर से कहा कि ये मुद्दा कांग्रेस-भाजपा का नहीं, छात्रों का है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग की।

Jul 22, 2026 - 17:42
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नीट पेपर लीक पर संसद में गूंजा अखिलेश का गुस्सा, कहा- "छात्रों की बात नहीं सुनी तो सड़क पर उतरेंगे"

नीट पेपर लीक विवाद को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव लगातार सरकार पर हमलावर हैं। बुधवार को लोकसभा में इस मुद्दे पर हंगामे के बीच उन्होंने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाया।

PM आवास से संसद तक प्रदर्शन  
मंगलवार को अखिलेश, राहुल गांधी के साथ PM आवास के बाहर छात्रों के समर्थन में धरने पर बैठे थे। दिल्ली पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया और देर रात छोड़ा।  
अगले दिन संसद में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

हमें क्यों नहीं बोलने दिया?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस मुद्दे पर कांग्रेस और BJP को बोलने का मौका दिया। इस पर अखिलेश यादव खड़े हो गए।  
उन्होंने कहा, "आपने इन्हें और उन्हें बोलने दिया, हमारा क्या? ये कांग्रेस या सपा का मुद्दा नहीं है। ये देश के छात्रों का मुद्दा है।"  
बाद में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "सरकार को पहले बुलवा दो, फिर एक दल को मौका दो। बाकी दलों को इग्नोर कर दो। इसे क्या समझें?"

इस्तीफे और पुलिस एक्शन पर सवाल  
अखिलेश ने मांग की कि पहले मंत्री इस्तीफा दें, फिर चर्चा हो।  
हम जब चाहेंगे मंत्री से इस्तीफा ले लेंगे। अगर सदन में नहीं देंगे तो सदन के बाहर ले लेंगे।
उन्होंने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का भी जिक्र किया। आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के हाथ तोड़े गए, सिर फोड़ दिए गए और कपड़े फाड़े गए।  
"मैं और राहुल गांधी PM आवास पर मजबूरी में गए थे। अगर सदन में हमारी बात सुन ली जाती तो हमें वहां जाने की जरूरत नहीं पड़ती।"

सड़क पर उतरेंगे
सपा प्रमुख ने चेताया कि अगर छात्रों की बात संसद में नहीं सुनी गई तो पार्टी सड़कों पर उतरेगी।  
उन्होंने कहा, "ये आंदोलन किसी पार्टी का नहीं है। छात्र खुद अपने स्तर पर लड़ रहे हैं। उन्हें खाने-पीने, रहने का इंतजाम कौन कर रहा है? कोई नहीं। हम उनकी आवाज बनना चाहते हैं।"

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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