JPSC नियुक्ति घोटाले में पूर्व चेयरमैन को बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज
झारखंड के बहुचर्चित JPSC नियुक्ति घोटाले में पूर्व अध्यक्ष एल खियांगते की जमानत याचिका CID कोर्ट ने खारिज कर दी है। उन पर ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को परीक्षा का काम देकर कमीशन लेने का आरोप है। इस मामले में अब तक 20 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
रांची - जेपीएससी नियुक्ति में गड़बड़ी से जुड़े मामले में पूर्व अध्यक्ष एल खियांगते को सीआईडी कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है।
इससे पहले 3 सितंबर को कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
बचाव पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया था कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है। छापेमारी के दौरान भी ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला जिससे उन्हें दोषी साबित किया जा सके, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं सीआईडी ने अपनी जांच रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी के मुताबिक एक ब्लैकलिस्टेड प्राइवेट कंपनी TDPL को परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी दिलाने में पूर्व चेयरमैन की अहम भूमिका रही और इसके बदले में मोटा कमीशन लिया गया। जांच के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश सामने आने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था, तब से वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
सीआईडी ने इस मामले में कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। जांच के दौरान रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ भी की गई थी।
बताया जा रहा है कि इस घोटाले में अब तक 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस केस के कथित किंगपिन अभय तिवारी ने स्वीकारोक्ति बयान में कई अहम जानकारियां सीआईडी को दी हैं, जिसके आधार पर जांच आगे बढ़ रही है।
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