केंद्र में समर्थन बिहार में विरोध - 2029 तक UCC लागू करने के अमित शाह के ऐलान पर JDU क्यों अड़ी, 7 बड़े फैक्टर

गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में कहा NDA शासित राज्यों में UCC 2029 तक लागू होगा, कई राज्यों में लागू हो चुका है। इस पर JDU विधायक श्याम रजक ने कहा संसद में समर्थन किया था लेकिन नीतीश कुमार ने तभी साफ किया था बिहार में लागू नहीं होगा, पार्टी आज भी उसी स्टैंड पर है। बिहार में BJP के CM हैं लेकिन सरकार गठबंधन की है, अकेले फैसले से UCC नहीं लगेगा। संजय झा जल्द अमित शाह से मिलेंगे। JDU के विरोध के पीछे 7 फैक्टर - बिहार का सामाजिक समीकरण, नीतीश की समावेशी राजनीति, अल्पसंख्यक वोट, संसद और राज्य में अंतर, सहयोगी लेकिन वैचारिक गुलाम नहीं, भाजपा का वैचारिक एजेंडा बनाम बिहार की जरूरत, और बातचीत से समाधान। विजय चौधरी बोले पहले ड्राफ्ट देखेंगे फिर चर्चा होगी।

Sep 15, 2026 - 17:46
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केंद्र में समर्थन बिहार में विरोध - 2029 तक UCC लागू करने के अमित शाह के ऐलान पर JDU क्यों अड़ी, 7 बड़े फैक्टर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में ऐलान किया कि NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता 2029 तक लागू कर दी जाएगी। कई जगह लागू हो चुका है, बाकी जगह काम पूरा होगा। ऐलान के साथ ही बिहार से पहला विरोध JDU से आया।

JDU विधायक श्याम रजक ने कहा - संसद में हमने UCC बिल का समर्थन जरूर किया था, लेकिन उसी वक्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कह दिया था बिहार में इसे लागू नहीं होने देंगे। पार्टी आज भी उसी स्टैंड पर कायम है।

उन्होंने कहा बिहार में भले BJP के मुख्यमंत्री हैं, सरकार गठबंधन की है, JDU समेत सहयोगी भी हैं। अकेले BJP के फैसले से UCC का सवाल ही नहीं। सहमति के बिना संवेदनशील मुद्दे पर आगे नहीं बढ़ सकते। इसके बाद खबर आई कि JDU कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे।

तो केंद्र में समर्थन और बिहार में विरोध क्यों? 7 फैक्टर:

1. बिहार का सामाजिक समीकरण: JDU का बेस सवर्ण-हिंदुत्व पर नहीं, पिछड़ा-अति पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक बैलेंस पर है। UCC से ध्रुवीकरण का डर।

2. नीतीश की पहचान: सुशासन और समावेशी राजनीति। भाजपा के साथ रहते हुए भी JDU ने अलग लाइन रखी है।

3. अल्पसंख्यक संदेश: कई सीटों पर मुस्लिम निर्णायक हैं। UCC के विरोध से JDU यह दिखाना चाहती है कि बिना सहमति बदलाव के पक्ष में नहीं।

4. संसद बनाम राज्य: राष्ट्रीय स्तर पर सिद्धांत समर्थन और राज्य में तत्काल लागू करने से इनकार अलग फैसले हैं।

5. सहयोगी हैं, इकाई नहीं: विशेष राज्य का दर्जा, जातीय जनगणना, अग्निवीर पर पहले भी JDU ने अलग राय रखी है।

6. 2029 का एजेंडा: BJP के लिए UCC वैचारिक प्राथमिकता है, JDU के लिए विकास और क्षेत्रीय नेतृत्व ज्यादा जरूरी।

7. बातचीत का रास्ता: JDU टकराव नहीं चाहती। संजय झा की अमित शाह से मुलाकात से बातचीत का रास्ता खुला है।

उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी ने भी कहा - "प्रावधान क्या है पता नहीं, पहले अध्ययन करेंगे, फिर अमित शाह से चर्चा होगी। प्रावधान आने दीजिए।"

मतलब JDU समर्थन और विरोध के बीच संतुलन साध रही है। अब देखना है शाह-झा मुलाकात के बाद साझा रास्ता निकलता है या मतभेद गहराते हैं।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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