अनंत सिंह पर एक्शन लेगा JDU तो किसका होगा नुकसान? मोकामा के 'छोटे सरकार' के आगे क्यों बेबस हैं नीतीश-लालू

JDU विधायक अनंत सिंह ने MLC चुनाव में अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ जनसुराज के अनुज सिंह को समर्थन दे दिया है। क्या JDU अनंत सिंह पर कार्रवाई कर सकता है? मोकामा में 'अनंतवाद' के आगे क्यों फेल हैं सारे समीकरण, जानिए पूरी कहानी।

Oct 01, 2026 - 18:08
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अनंत सिंह पर एक्शन लेगा JDU तो किसका होगा नुकसान? मोकामा के 'छोटे सरकार' के आगे क्यों बेबस हैं नीतीश-लालू

मोकामा। क्या JDU अनंत सिंह पर अनुशासन के नाम पर कार्रवाई करने की हिम्मत रखता है? और अगर कार्रवाई की भी तो नुकसान किसका होगा? ये दो सवाल आज बिहार की सियासत में सबसे बड़े हैं।

JDU के लिए उल्टा दांव पड़ेगा

दरअसल MLC चुनाव में अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी JDU के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ बगावत कर दी है और जनसुराज के अनुज सिंह को समर्थन दे दिया है। अनंत सिंह का कहना है, "उसने मुझे जेल भेजवाया, मेरी छवि खराब की, ये मेरे मान-सम्मान पर चोट है। ये अब आन की लड़ाई है।"

अगर JDU इस पर अनंत सिंह पर एक्शन लेता है तो क्या गारंटी कि नीरज कुमार जीत जाएंगे? अनंत सिंह निर्दलीय भी जीतने की क्षमता रखते हैं, ये सभी जानते हैं। 2015 से 2020 तक वो निर्दलीय विधायक रहकर नीतीश-लालू दोनों को हरा चुके हैं।

मोकामा में चलता है सिर्फ 'अनंतवाद'

अनंत सिंह राजनीति के आम ढर्रे से अलग हैं। बेलाग, बेलौस। जनता के बीच वो 'छोटे सरकार' हैं। मोकामा में न अगड़ावाद चलता है, न पिछड़ावाद, चलता है तो सिर्फ अनंतवाद। उन्हें भूमिहार के साथ OBC वोट भी मिलता है।

याद कीजिए, 2015 में उन्हें पकड़ने के लिए 500 से ज्यादा पुलिस, 3 IPS, ATS, STF लगा दी गई थी। जेल भेजा गया तो लोकप्रियता और बढ़ गई। वो खुद कहते हैं - जनता ही मेरा मालिक है।

वो नेता जो कहता है 'मैं अनपढ़ हूं'

अनंत सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनकी ईमानदारी है। आज कौन विधायक कहेगा कि "मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूं इसलिए मंत्री नहीं बनना चाहता, विधायक ही ठीक हूं"? वादे के पक्के हैं। 1991 और 2004 में नीतीश कुमार को बिना लालच मदद की थी, तभी नीतीश ने 2005 में उन्हें खुद ऑफर देकर JDU में लाया था।

जब अनंत सिंह ने फरवरी 2015 में जीतन राम मांझी को ऑन कैमरा थप्पड़ मारने की धमकी नीतीश के समर्थन में दी थी, तब वो अच्छे थे। अब अपने साथ हुए धोखे का हिसाब मांग रहे हैं तो खराब हो गए?

अंजाम चाहे जो हो, अनंत सिंह पीछे नहीं हटेंगे। उन्हें अगर कोई मना सकता है तो वो खुद अनंत सिंह ही हैं।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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